लोकपाल पर नर्म पड़ा टीम अन्ना का रुख

शीतकालीन सत्र में सरकार ने जो लोकपाल बिल पेश किया है उसमें टीम अन्ना की ज्यादातर शर्तों की अनदेखी की गई है। जिसके बाद अन्ना हजारे ने 11 दिसंबर को जंतर-मंतर पर एकदिनी सांकेतिक अनशन किया था। जिसमें ज्यादातर बड़ी राजनीतिक पार्टियों ने हिस्सेदारी दी थी। भाजपा सहित कई प्रमुख दल अन्ना हजारे की कई शर्तों से सहमत नहीं दिखे। टीम अन्ना ने इस अनशन में कांग्रेस को भी निमंत्रण भेजा था। पर कांग्रेस का कोई भी सांसद जंतर-मंतर नहीं पहुंचा। अन्ना के एक दिन के अनशन के बावजूद यूपीए सरकार टस से मस नहीं हुई।
यूपीए सरकार की प्रमुख पार्टी कांग्रेस ने इस मामले में अपना कड़ा रुख अपनाया हुआ है। कांग्रेस ने कहा है कि वे मजबूत लोकपाल बिल लेकर आएगी। इतना ही नहीं सरकार ने जनता से लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने का भी आश्वासन दिया है। जिसकी शुरुआत राहुल गांधी ने की थी। कांग्रेस और टीम अन्ना में इस समय अन्ना हजारे द्वारा राहुल गांधी पर की गई टिप्पणियों की वजह से तनाव है। अन्ना हजारे ने जंतर-मंतर से कहा था कि सरकार लोकपाल बिल पर जो भी कदम उठा रही है उसके पीछे राहुल गांधी हैं।
सरकार के लोकपाल बिल और अन्ना हजारे के लोकपाल बिल में इस समय कई मतभेद हैं। जिसमें सीबीआई को लोकपाल बिल में शामिल करने, पीएम को इसके दायरे में लाने और ग्रुप सी व ग्रुप डी को इसके दायरे में लाने संबंधी शर्तें शामिल हैं। इन शर्तों में पीएम और सीबीआई को लेकर ज्यादातर पार्टियों ने अपनी राय स्पष्ट नहीं की है। जिस वजह से टीम अन्ना का रुख कुछ नर्म पड़ गया है।












Click it and Unblock the Notifications