भारत को यूरेनियम देना का फैसला गलत
मेलबर्न।
आस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री मैलकम फ्रेजर ने भारत को यूरेनियम बेचने पर लगी पाबंदी हटाए जाने के प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह सब अमेरिकी दबाव में हुआ है। समाचार पत्र द एज में लिखे एक लेख में फ्रेजर ने कहा कि आस्ट्रेलिया का अमेरिकी दबाव में आना शर्मनाक है। id="toptextpromo">फ्रेजर
1975 से 1983 तक आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि जूलिया गिलार्ड ने यह फैसला करके बहुत बड़ी गलती की है। इस मामले को लेकर लेबर पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन में लोग बंटे हुए थे और यह फैसला एक नाकाम राजनीतिक नेतृत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस फैसले के दूरगामी परिणाम यह होंगे कि इससे भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु हथियारों की होड़ बढ़ जाएगी। id='are-slot-1' class='oiad oi-axt oiadv'> id='top-searched-articles'>परमाणु
अप्रसार को लेकर पहले से ही दोनों देश पीछे की ओर खिसक कर रहे हैं। दक्षिण एशिया के इन दोनों देशों के बीच परमाणु हथियारों की जंग कोई सैद्धांतिक आशंका नहीं है, बल्कि वास्तविक और बहुत खतरनाक है। ऑस्ट्रेलिया की सत्तारुढ़ लेबर पार्टी ने भारत को यूरेनियम बेचने पर लगी रोक को हटाने के पक्ष में मतदान किया, जिससे परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले देशों को भी यूरेनियम निर्यात करने का रास्ता साफ हो गया। सिडनी में लेबर पार्टी के 46वें राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान 206 प्रतिनिधियों ने भारत को यूरेनियम निर्यात किए जाने के पक्ष में मतदान किया जबकि 185 प्रतिनिधियों ने इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया।











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