पत्रकारों के लिये हो आचार-संहिता: उमर अब्दुल्ला

अपने पत्र में काटजू ने कहा था कि अगर पुलिस और अर्द्धसैनिक बल प्रदर्शनों और अन्य घटनाओं की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों पर हमला करते हैं तो पीसीआई उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दायर करेगी। अब्दुला ने कहा, यह हमारे लिए काफी आसान है कि घटनास्थल से काफी दूर बैठकर हम यह सुझाव दें कि पुलिस को कैमरों की तरफ देखकर यह पता लगाना चाहिए कि फलां व्यक्ति प्रेस से है या नहीं। लेकिन, कठिन परिस्थितियों में जब पत्थर और आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहे हों तो पुलिस के लिए यह आंकलन करना प्राय: नामुमकिन होता है।
काटजू के पत्र के जवाब में अब्दुला ने कहा कि वह पत्रा के पीछे की भावना को समझते हैं लेकिन वह यह कहना चाहेंगें कि मीडियाकर्मियों को निशाना बनाने की पुलिस की कभी मंशा नहीं रही है। आचार-संहिता की बात पर अब्दुला ने कहा कि ब्रिटेन जैसे देशों में प्रदर्शनों, धरनों और अन्य स्थितियों की रिपोर्टिंग के लिए पत्रकारों की खातिर आचार-संहिता है। उन्होंने कहा, हमारे देश में पत्रकारों के लिए ऐसी कोई आचार-संहिता नहीं है। पीसीआई के लिए अब वक्त आ गया है कि वह राज्यों और मीडिया बिरादरी के परामर्श से इस तरह की संहिता का निर्माण करे।
उन्होंने कहा, इस तरह की स्थितियों में आप जब तक पत्रकारों और कैमरामैनों को पहचानने के तरीकों को आसान नहीं बनाते तब तक मुझे डर है कि इस तरह की चूकें होती रहेंगी। मीडियाकर्मियों की सुरक्षा की बात पर अब्दुला ने कहा कि जो पत्रकार बढि़या तस्वीरें उतारने के मकसद से भीड़ में शामिल हो जाते हैं उन्हें चमकीले जैकेट पहनने चाहिए ताकि सुरक्षा एजेंसियां उन्हें आसानी से पहचान लें।
उमर अब्दुला ने इस बात पर भी जोर दिया कि अगर इस तरह की संहिता का निर्माण हो जाएगा तो जम्मू-कश्मीर में तैनात सुरक्षाकर्मी इनका पालन करेंगे। इससे पहले, कुछ मीडियाकर्मी काटजू के पास पहुंचे थे और उन्होंने आरोप लगाया था कि एक प्रदर्शन की रिपोर्टिंग करने के दौरान पुलिस ने उन पर हमला किया था। हालांकि, पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि वह भीड़ में शामिल मीडियाकर्मियों को पहचान नहीं पाई थी।












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