आईएम चीफ यासीन भटकल ने साथी की बेटी को रख लिया

यासीन भटकल पर पहले तीन लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसे बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दिया गया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक भटकल दिल्ली में तीन मामलों में वांछित है। इसके अलावा देश में अन्य आतंकी वारदातों में भी उसकी तलाश है। भटकल ने मोहम्मद आदिल और कतील सिद्दीकी के साथ मिलकर जामा मसजिद के बाहर आतंकी हमले को अंजाम दिया था। कॉमनवेल्थ खेलों से पहले जामा मसजिद के बाहर ताइवानी मीडिया टीम पर हमला किया गया था। इसी इलाके में एक कार में हुए धमाके में भी भटकल वांछित है। उन्होंने बटला हाउस एनकाउंटर का बदला लेने के लिए यह वारदात की थी। मोहम्मद आदिल और कतील सिद्दीकी को हाल में गिरफ्तार किया जा चुका है। कर्नाटक के भटकल गांव के रहने वाले यासीन भटकल को आईएम का अहम कर्ताधर्ता माना जाता है।
इस बीच पुणे के जर्मन बेकरी ब्लास्ट की जांच कर रही महाराष्ट्र एटीएस की टीम भी आईएम के गिरफ्तार छह आतंकियों से पूछताछ के लिए मुंबई से दिल्ली पहुंच रही है। इन छह गिरफ्तार आतंकियों पर पुणे, बंगलूरू और दिल्ली में जामा मसजिद के पास आतंकी वारदात में शामिल होने के आरोप हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यासीन दो बार दिल्ली पुलिस के शिकंजे में आने से बचा है। बिहार से मो. आदिल और गयूर अहमद को गिरफ्तार करने के बाद सेल दिल्ली के मीर विहार में दबिश दी, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही यासीन निकल गया। इसके बाद यासीन चेन्नई में मो. इरशाद और अब्दुल रहमान के पास पहुंचा। सेल ने यहां दबिश देकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया जबकि यासीन फिर बच निकला।
वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार बिहार में दबिश की जानकारी यासीन को मिल गई थी। इसे खुफिया विभाग की नाकामयाबी ही कहेंगे कि यासीन दिल्ली में साड़ियों में जरी लगाने की फैक्टरी की आड़ में आईएम के लिए हथियारों की फैक्टरी चला रहा था। इसका ज्यादातर समय दिल्ली में ही गुजरा। मो. इरशाद की पहले ओखला में साड़ियों में जरी आदि लगाने की फैक्टरी थी। यासीन के कहने पर फैक्टरी को मीर विहार में स्थानांतरित किया गया। यहां मो. इरशाद का 150 गज का प्लाट है। यासीन ने ही यहां इरशाद को हथियार बनाने की मशीन दिलवाई थी। मशीनें का सारा पैसा यासीन ने ही दिया था। शाहरुख की शाहीन बाग में रहने के दौरान इरशाद से मुलाकात हुई थी। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार यासीन ने आईएम के दक्षिण भारत के मॉड्यूल के सदस्यों को कभी अपना असली नाम नहीं बताया। वह हर सदस्य को अपना-अलग नाम बताता था। इस कारण अन्य सदस्य उसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखते, न ही इसने सदस्यों को कभी अपने ठिकानों के बारे में बताया।












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