कोर्ट ने सुखराम की सजा को किया स्‍थगित, दी जमानत

sukhram
नयी दिल्ली। पूर्व दूरसंचार मंत्री सुखराम को एक बड़ी राहत देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज भ्रष्टाचार के एक मामले में पांच साल कैद की उनकी सजा को स्थगित कर दिया और उन्हें जमानत दे दी। न्यायमूर्ति सुरेश कैत की पीठ ने उनकी वृद्धावस्था और विभिन्न बीमारियों को देखते हुए सजा को स्थगित कर दिया।

अदालत ने कहा कि मैं मामले के निपटारे तक सजा को स्थगित करता हूं। अदालत ने सुखराम की 86 वर्ष की अवस्था और ह्दय संबंधी बीमारी से पीडि़त होने एवं तिहाड़ जेल के अधिकारियों द्वारा दाखिल की गई मेडिकल रिपोर्ट को देखते हुए उन्हें जमानत दे दी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वह ह्दय से संबंधित बीमारी और सर्वाइकल स्पोंडलाइटिस से पीडि़त हैं।

अदालत ने सुखराम को निर्देश दिया कि वे 10 लाख रूपये के दो मुचलके जमा करे और उसकी अनुमति के बिना देश नहीं छोड़े। सीबीआई ने इस जमानत का विरोध किया और कहा कि वह इससे पहले दो बार दोषी ठहराये जा चुके हैं और अपराध के आदी हैं। सुखराम को दूर संचार मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान दूर संचार विभाग को साढे तीन लाख कंडक्टर किलोमीटर की आपूर्ति के लिये हरियाणा टेलिकाम लिमिटेड को 30 करोड़ रपये का ठेका दिये जाने में आधिकारिक पद के दुरूपयोग का दोषी ठहराया गया था।

इसके अलावा उन्हें तीन लाख रूपये रिश्वत लेने का भी दोषी ठहराया गया था। पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव की कैबिनेट में दूरसंचार मंत्री रह चुके सुखराम 17 नवंबर को केबल का एक ठेका दिये जाने के मामले में दोषी ठहराये गये थे। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश आर पी पांडे ने 19 नवंबर को उन्हें पांच साल जेल की सजा सुनाई थी और जेल भेज दिया था। सुखराम इससे पहले भी दो अलग अलग मामलों में वर्ष 2002 और 2009 में दोषी ठहराये जा चुके हैं लेकिन सजा स्थगित कर दिये जाने के कारण वे जेल से बाहर हैं।

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