विदेशी किराना स्टोर पर संसद से सड़क तक घिरी सरकार

इस बिल के तहत रिटेल सेक्टर की बड़ी कंपनी वॉलमार्ट भारत में विदेशी किराना स्टोर खोलेगी। जिसमें 51 फीसदी विदेशी निवेश होगा। सरकार ने इस बिल को मंजूरी दिलाने के लिए इसे लोकसभा पटल पर रखा था। जिसके बाद से इस बिल को लेकर बवाल मचा हुआ है। इस बिल के पेश होने के बाद से संसद की कार्रवाई सुचारू रूप से नहीं चल पाई है। संसद की 5 दिनों की कार्रवाई इस बिल के विरोध में पूरी तरह से प्रभावित रही है।
यूपीए सरकार ने इस बिल को पेश करते हुए यह कहा है कि राज्य सरकार पर निर्भर करता है कि वह अपने यहां किराना स्टोर में विदेशी निवेश को अनुमति दे या नहीं। जिसके बाद ज्यादातर राज्यों ने भी इस बिल के विरोध में बोलना शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने इस बिल को राहुल गांधी के विदेशी दोस्तों को फायदा पहुंचाने वाला बिल करार देते हुए इसकी खिलाफत की है। उन्होंने कहा है कि जब तक वे मुख्यमंत्री हैं तब तक राज्य में विदेशी निवेश को मंजूरी नहीं देंगी।
इस बिल के विरोध में यूपीए सरकार के विरोधी दलों का ही नहीं अपनों का भी विरोध झेलना पड़ रहा है। यूपीए घटक दल डीएमके ने भी इस बिल को वापस लेने की बात कही है। वहीं केरल जहां कांग्रेस की सरकार है वहां भी इस बिल का विरोध हुआ है। छोटे किराना स्टोर वालों ने तो इसके खिलाफ शुरुआत से ही सड़कों पर उतरने का फैसला कर लिया था। अब देखना है कि घटक दलों, अपनी पार्टी नेताओं, विपक्षी दलों और जनता से घिरी सरकार इस बिल पर क्या फैसला ले पाती है।












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