विदेशी कम्पनियों का आना देशहित में नहीं: सीपीएम

CPI protests against Walmart in India
लखनऊ। किसी भी कीमत पर विदेशी कम्पनियों को भारत आने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, यह देश हित में नहीं है। मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) की सदस्य व पूर्व सांसद सुभाषिनी अली ने कहा कि यदि ऐसा हो गया तो घरेलू उद्योग धन्धे चौपट हो जायेंगे और लाखों लोग भुखमरी का शिकार हो जायेंगे।

सुश्री अली विदेशी कम्पिनयों के भारत आने के सख्त खिलाफ हैं। उनका तर्क है कि देशी व विदेशी बड़े सेक्टर की कम्पनियां सरकार के बडे कारखानों एवं कर्मचारियों को खरीदकर बिजली एवं पानी जैसे महत्वपूर्ण सेक्टरों पर कब्जा जमाती जा रही हैं जो देशहित में नहीं है। विदेशी कम्पनियां पहले लालच देकर बाद में दोहन करती हैं जो सबसे खतरनाक है। उन्होंने कहा कि इसे हर एक को गंभीरता से लेना होगा नहीं तो घरेलू उद्योग धन्धे चौपट हो जायेंगे तथा लाखों लोग बेबसी एवं भुखमरी के शिकार हो जायेंगे।

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार का सवाल उतना गंभीर नहीं है जितना कारपोरेट सेक्टर के बढ़ते प्रभाव का। वहीं सुश्री अली ने चुनाव में बढ़ती फिजूलखर्ची एवं बाहुबल के बढ़ते प्रभाव पर चिन्ता जाहिर करते हुए कहा कि चुनाव सरकारी खर्चे पर लड़ा जाना चाहिए। मनमानी खर्च की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए उनकी पार्टी किसी बड़े दल के साथ गठबन्धन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी 100 उम्मीदवारों को खड़ा करेगी।

उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश होगी कि गैर भाजपा व गैर कांग्रेस छोटे मोटे दलों से चुनावी तालमेल किया जाये। केन्द्र सरकार द्वारा बुनकरों के 50 हजार रुपये की कर्ज माफी के सवाल पर उन्होंने कहा कि इससे बुनकरों को खास लाभ नहीं होगा। इसका लाभ बैंकों एवं बिचौलियों को होगा। उन्होंने कहा कि यह घोषणा बनुकरों को लाभ पहुंचाने के लिए कम उनके वोट बटोरने के लिए ज्यादा है।

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