बिहार में महिलाओं पर भारी डायन

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पटना। डायन बताकर महिलाओं की हत्या और उन्हें प्रताडि़त करने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग (बीएचआरसी) ने ऐसी कुप्रथा के लंबित मामलों के निपटारे और कार्रवाई के लिए राज्य के पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया है। मानवाधिकार आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति (अवकाशप्राप्त) राजेंद्र प्रसाद ने डायन प्रथा के कारण प्रताड़ना को मानवाधिकार का घोर उल्लंघन बताते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी करके ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई करने और विभिन्न जिलों में लंबित मामलों की सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

एक गैरसरकारी संस्था बिहार वीमेंस नेटवर्क की रिपोर्ट का बीते महीने संज्ञान लेते हुए आयोग ने पुलिस प्रशासन के शीर्ष अधिकारी को नोटिस जारी किया है। एनजीओ ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि राज्य में डायन बताकर महिलाओं के उत्पीड़न के मामलों की पुलिस ठीक तरीके से जांच नहीं करती और इससे कर्तव्यपालन में पुलिस की लापरवाही सामने आती है।

वर्ष 1989 से बिहार, झारखंड, उड़ीसा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में काम कर रहे इस एनजीओ के अनुसार डायनप्रथा उन्मूलन अपराध कानून 1999 के तहत बिहार के विभिन्न जिलों में 177 मामलों की जांच या सुनवाई लंबित है। आयोग ने डीजीपी से कहा है कि वह ऐसे मामलों को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से जांच करने के लिए सभी पुलिस अधीक्षकों को निर्देश देंगे।

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