केंद्र ने शशांक शेखर की नियुक्ति पर माया सरकार को घेरा

उत्तर प्रदेश सरकार दलील दे रही है कि शेखर की नियुक्ति नियम प्रक्रिया के तहत की गई है, जबकि ऐसी कोई नियम-प्रक्रिया देखने को नहीं मिलती। कैबिनेट सचिव के पद पर नियुक्ति की योग्यता, मानदंड व शर्ते नहीं हैं। कोई भी पद सृजन या नियुक्ति संवैधानिक नीति और विधायी प्रावधानों के बाहर नहीं हो सकती। केंद्र ने कहा है कि सरकारी स्तर पर प्रशासनिक तंत्र में एकरूपता देश की संघीय नीति का हिस्सा है और राज्य के सर्वोच्च पद पर आल इंडिया सर्विस कैडर से नियुक्ति द्वारा इसे सुनिश्चित किया जाता है। उप्र में मुख्य सचिव के पद से भी ऊपर कैबिनेट सचिव का पद सृजित होने से पूरा प्रशासनिक तंत्र प्रभावित हुआ है। राज्य सरकार को कैबिनेट सचिव का पद सृजित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मुद्दे पर दाखिल चुनौती याचिका पर सुनवाई करते हुए कई अहम सवाल खड़ा किए हैं। कोर्ट ने कहा है कि नियुक्ति के संबंध में कोई नियम-प्रक्रिया तो होनी ही चाहिए। ऐसे कैसे किसी को नियुक्ति के लिए चुना जा सकता है। अदालत ने शशांक शेखर को निर्देश दिया कि वह दस दिनों में जवाबी हलफनामा दाखिल करें।
न्यायमूर्ति बीएस चौहान और टीएस ठाकुर की पीठ ने सोमवार को हरीश चंद्र पांडे की चुनौती याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, तकनीकी क्षेत्र में महारत रखने वाले सैम पित्रोदा जैसे व्यक्ति को बतौर सलाहकार नियुक्त किया जाता है, लेकिन कैबिनेट सचिव जैसे ओहदे के लिए उचित प्रक्रियाएं होनी चाहिए। पीठ ने कहा, अगर कोई कंप्यूटर जैसे क्षेत्र में विशेषज्ञ है और जिसने सैम पित्रोदा की तरह अपने क्षेत्र में असाधारण रूप से अच्छा काम किया है, उन्हें सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया जा सकता है, लेकिन कैबिनेट सचिव आदि पदों के लिए नियम और नियमन होने चाहिए। आप किसी को चुनकर कैसे इस पद के लिए नियुक्त कर सकते हैं। इसमें नियम और नियमन होने चाहिए।












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