पीएम मनमोहन बचाएंगे विजय माल्य की डूबती किंगफिशर को

गौरतलब है कि किंगफिशर ने सरकार से वित्तीय मदद की गुहार लगाई है। किंगफिशर के मुखिया विजय माल्या ने शुक्रवार को वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और विमानन मंत्री व्यालार रवि से मुलाकात कर एयरलाइन को बैंकों से सस्ता कर्ज दिलाने में मदद का अनुरोध किया। एयरलाइन को वर्ष 2010-11 में 1,027 करोड़ का घाटा हुआ। इस एविएशन कंपनी पर 7,057 करोड़ का कर्ज है। वित्तीय संकट से जूझ रही किंगफिशर के शेयरों की कीमत 20 रुपये से नीचे गिर गई है। यही कारण है कि कोई बैंक इसे आसानी से कर्ज देने को तैयार नहीं है।
जो बैंक कर्ज देने को राजी हैं वे बहुत ऊंची ब्याज दर लगा रहे हैं। इतना ही नहीं, एयरलाइन को ईधन मुहैया कराने वाली सरकारी तेल कंपनियों- इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने भी रोजाना एटीएफ का पूरा भुगतान करने को कह दिया है। इसी से परेशान होकर माल्या ने सरकार से गुहार लगाई है। माल्या इससे पहले भी कई मर्तबा सरकार के मंत्रियों से मिलकर मदद दिलाने का अनुरोध कर चुके हैं। रवि भी किंगफिशर को मदद की जरूरत मानते हैं। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि सरकार नहीं चाहती कि कोई भी भारतीय एयरलाइन संकट में रहे। इसकी समस्या से सरकार अछूती नहीं रह सकती। आखिरकार इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ेगा।
उधर, सियासी गलियारे मे चर्चा है कि किंगफिशर एयरलाइन को वित्तीय मदद के प्रस्ताव पर उठे विवाद के बाद सरकार ने कदम वापस खींच लिए हैं। सरकार ने साफ किया कि कंपनी के लिए ऐसी किसी मदद का ऐसा कोई प्रस्ताव उसके पास नहीं है। वैसे पूरे नागरिक विमानन क्षेत्र की दिक्कतों पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मालदीव से लौटने पर सरकार विचार कर सकती है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते पूरा एयरलाइन उद्योग दबाव में है।












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