पीएम पद की दौड़ में शामिल नहीं गडकरी

मालूम हो कि प्रधानमंत्री पद को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच रस्साकसी जारी है। गडकरी के समर्थक गडकरी को प्रधानमंत्री पद के लिए उपयुक्त बता रहे हैं। इसी बीच गडकरी का यह बयान राजनीतिक हलकों में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गडकरी ने खुद को इस दावेदारी से अलग करते हुए कहा कि उन्हें उन नेताओं को नजदीक से देखने का मौका मिला है जिन्होंने गरीबों के लिए बिना किसी पद की लालसा के बगैर जमकर काम किया।
उन्होंने नानाजी देशमुख और भाऊराव देवरस को अपना आदर्श बताते हुए कहा कि वह उन्हीं के पदचिन्हों पर चलकर राजनीति करना चाहते हैं, उन्हें पद का कभी लालच नहीं रहा। गडकरी ने कहा कि पत्रकार उन्हें उद्योगपति कहते हैं जबकि सच्चाई है कि वह उद्योगपति नहीं हैं। उन्होंने जनता से पैसे लेकर जनता के लिए रोजगार उपलब्ध कराया।
गडकरी ने सफाई देते हुए कहा कि मेरी तो मात्र एक लाख रुपये की पूंजी लगी है। उन्होंने कहा कि जनता को रोजगार मुहैया कराने का उन्होंने लगातार प्रयास किया है और यह जारी रहेगा। गडकरी ने कहा कि जनता से उन्होंने पांच सौ करोड़ रुपये की पूंजी एकत्र कर उद्योग लगवाया और उसी चीनी उद्योग से 40 करोड़ रुपये वार्षिक बिजली भी पैदा हो रही है। उनका कहना है कि उन्होंने दस हजार लोगों को रोजगार दिया है।












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