सुपर चोर मनोज फिर भाग निकला, इंस्पेक्टर को रौंदा

पुलिस के मुताबिक मनोज वाहन चोरी के 500 से अधिक मामले में लिप्त रहा है। क्राइम ब्रांच उसके खिलाफ जांच कर रही है। मनोज बक्करवाला का पुलिस के साथ यह कोई पहली मुठभेड़ नहीं है। इससे पूर्व भी 8 मई, 2009 को रोहिणी सेक्टर-22 में पुलिस ने जब मनोज को घेरा लेकिन वहां से भी पुलिस पर गोली चलाकर भागने में कामयाब हो गया। हालांकि 17 जुलाई, 2009 को पुलिस की स्पेशल सेल ने नजफगढ़ ड्रेन के पास से होंडा सिटी कार में साथ मनोज और उसके साथी परवीन को गिरफ्तार कर लिया था। फिर जून, 2011 को हरियाणा पुलिस जब साकेत कोर्ट में पेशी के लिए लेकर आई थी तो वहां फरार हो गया था। मनोज ने 1998 में अपराध की दुनिया में आया। माखन बदमाश के साथ काम शुरू किया।
पुलिस ने पहली बार 1998 में कार चोरी के मामले में गिरफ्तार किया। जमानत के बाद आसानी से पैसा कमाने के लिए वारदात करता रहा। पुलिस की क्राइम ब्रांच में 2003 में गिरफ्तार किया तो फिर 8-9 महीने में जमानत पर छूट गया। फिर क्राइम ब्रांच ने 2005 में में कार चोरी के मामले में गिरफ्तार किया। एक साल बाद फिर जमानत मिल गई। गुड़गांव पुलिस ने कार जैकिंग के मामले में गिरफ्तार किया। वहां परवीन से दोस्ती हुई। जिसने जेल से निकले के बाद मनोज को फरार कराने का षड़यंत्र रचा। जुलाई 2008 में हरियाणा पुलिस की कस्टडी से द्वारका कोर्ट में पेशी के बाद फरार हो गया।












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