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नर्सिंग होम का मालिक भी गरीबी रेखा के नीचे

Nursing Home owner found below Poverty Line in Uttar Pradesh
लखनऊ। एनआरएचएम की स्मार्ट कार्ड स्वास्थ्य बीमा योजना में फिर भ्रष्टाचार का खुलसा हुआ। सोनभद्र में हुए इस घोटाले में अधिकारियों व कर्मचारियों ने ऐसे लोगों के कार्ड जारी कर दिए जो योजना के पात्र नहीं थे। आपसी मिलीभगत से मिशन का करोड़ों रुपये की बंदरबाट हो गयी। आलम यह है कि जिले एक नर्सिंग होम संचालक को बीपीएल कार्ड धारक की श्रेणी में रखा गया और उसका स्मार्ट कार्ड निर्गत हो गया इतना ही नहीं उपरोक्त चिकित्सक के पास 500 कार्ड भी मिले जो उसके स्टाफ के नाम पर जारी किए गये थे।

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन गरीबी रेखा के नीचे के बीपीएल कार्ड धारक परिवार को स्मार्ट कार्ड बनाकर देता है। परिवार के चार सदस्यों को मिलने वाले इस कार्ड के माध्यम से प्रति कार्ड 30 हजार रूपये इलाज के लिए दिए जाते हैं। केंद्र सरकार द्वारा संचालित योजना के कार्ड बनाने के लिए विभिन्न बीमा कम्पनियों से अनुबंधित किया गया है। योजना की धनराशि का 75 प्रतिशत हिस्सा केन्द्र तथा 25 प्रतिशत राज्य सरकार देती है।

कार्ड धारक को प्रति वर्ष नवीनीकरण शुल्क के रूप में मात्र 30 रुपये देने होते हैं। यह लोकप्रिय योजना सरकार ने भले ही गरीबों के लिए बनायी हो लेकिन विभाग में बैठे भ्रष्टi कर्मचारी व अधिकारियों से इस बचा पाना मुमकिन नहीं है। हेल्थ इंडिया के उपाध्यक्ष बीपी एलेक्स के अनुसार फर्जी कार्ड बनाने की शिकायतें मिल रही है और अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज करायी गयी है। अधिकारी बताते हैं कि योजना में दो हजार से पांच हजार रुपये लेकर कई ऐसे लोगों के कार्ड जारी कर दिए गये जो इसके पात्र नहीं थे।

पैसों के लालच में विभागीय अधिकारियों ने बीमा करने वाली संस्था से मिलकर व्यापारियों तक के कार्ड जारी कर दिए। जब शिकायत मिली तो जिला अधिकारियों ने इसकी रिपोर्ट मंगवाई लेकिन भ्रष्टाचार एक बार फिर सामने आया जांच अधिकारी ने अधूरी रिर्पोट प्रस्तुत की थी जिसे बाद में वापस भेजा गया। विभाग को शिकायत मिली है कि मानक और मापदंडों के विपरीत उत्तर प्रदेश के सोनभद्र, गाजीपुर, ललितपुर, भदोही, वाराणसी व चंदौली में हेल्थ इण्डिया के साथ दो अन्य कम्पनियां तथा स्थानीय जिला प्रशासन के संरक्षण में जूनियर इंजीनियर, डाक्टर व व्यवसाइयों तक को कार्ड जारी किए गये हैं और बदले में इनसे दो हजार से पांच हजार रुपये तक वसूले गए।

कार्ड बनाने वाली संस्था के अनुसार सोनभद्र में 40,440 बीपीएल कार्ड धारकों को स्मार्ट कार्ड दिए गये हैं जबकि जिले के जिला विकास अधिकारी के दस्तावेजों के अनुसार मात्र 25 हजार कार्ड ही जारी हुए है। अनुमान के आधार पर लगभग 10-15 हजार कार्ड फर्जी हैं। सूत्रों के अनुसार निजी प्रैक्टिस करने वाले एक चिकित्सक के पास करीब 500 कार्ड हैं नर्सिंग होम के मालिक इस चिकित्सक ने स्टाफ के फोटो तथा फर्जी अंगूठा का निशान लगाकर कार्ड बनवा लिए। चिकित्सक समय-समय पर कार्ड का प्रयोग कर सरकारी धन का आहरण कर लेता है। विभाग को मिली शिकायत के अनुसार जिले की कार्यदायी संस्था ने प्रदेश के 13 जिलों में करी एक लाख से अधिक ऐसे कार्ड जारी किए जो फर्जी हैं। हेल्थ इंडिया के उपाध्यक्ष बी पी एलेक्स के अनुसार मामले की एफआईआर दर्ज करा दी गयी है और जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।

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