वैज्ञानिकों ने माना, भूकंप का कारण है गर्म चट्टान

यह प्रक्रिया वैसी ही है जैसे सर्दी के दिनों में गर्मी हासिल करने के लिए आप अपने दोनों हाथों को एक दूसरे से रगड़ते हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि यह प्रक्रिया बेहद बड़े पैमाने पर होती है। शोधकर्ताओं के अनुसार कैलिफोर्निया के सान आंद्रिएस जैसे बड़े झरशों के स्थान पर एक दूसरे से टकराने वाली चट्टानों के कारण निकलने वाली उष्मा चट्टानों को पिघला देती है। इसके कारण चट्टानें संपर्क के सूक्ष्म स्थानों पर फिसलनदार हो जाती हैं और उनके बीच घर्षण कम हो जाता है जिससे काफी मात्रा में बलाघात पैदा होता है और इसके कारण भूकंप की स्थिति बन जाती है।
वही धरती पर एक मिलीमीटर तक की हरकत को नापने में सक्षम ग्लोबल पोजिशनिंग टेक्नोलॉजी (वैश्विक स्थापन प्रौद्योगिकी) से मिली नई जानकारी के अनुसार पता चलता है कि जमीन के नीचे चट्टानों के ढांचे में काफी दबाव बन गया है क्योंकि भारतीय उपमहाद्वीप, जिसके बारे में माना जाता है कि यह उत्तर की तरफ बढ़ रहा है, इस क्षेत्र से जुड़ गया है। इसके कारण बड़े भूकंपों के अंतराल में छोटे-छोटे भूकंप आ जाते हैं क्योंकि चट्टानें दबाव को कम करने के लिए खिसकती हैं। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि सिक्किम में मंगन कस्बे के 100 किमी के दायरे में पिछले 35 साल में 18 भूकंप आए। मंगन 18 सितंबर को आए भूकंप का केंद्र था। _________________________________________________________________












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