कपिल गुप्ता अपहरण: गुत्थी सुलझी, 4.25 करोड़ रुपये बरामद

आपको बताते चलें कि नोएडा एफ-31 सेक्टर-6 स्थित डेल्टा इलेक्ट्रॉनिक फैक्टरी के मालिक कपिल गुप्ता 21 सितंबर को फैक्टरी में काम करने वाली युवती को छोड़ने मर्सिडीज कार से दिल्ली गए थे। लौटते समय कार सवार बदमाशों ने उनकी कार में टक्कर मारकर कपिल को अगवा कर लिया था। 23 सितंबर को कपिल की पत्नी सोनिया ने बदमाशों को दौराला, मेरठ के पास पांच करोड़ की फिरौती दी थी। इसके बाद 24 सितंबर की शाम 7:50 बजे कपिल वापस घर आए थे।
उसके बाद से मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस के आला अधिकारी के नेतृत्व में एसओजी और सर्विलांस सेल को जांच में लगाया गया। सर्विलांस की मदद से एसओजी को पता चला कि बदमाश मेरठ के हैं। पांच दिन पहले एसओजी को बदमाशों के मेरठ में होने की जानकारी मिली। इसके बाद एसओजी ने मेरठ में डेरा डाल दिया। मंगलवार शाम टीम ने सर्विलांस की मदद से मेरठ के सरधना थाना क्षेत्र के दबथुवा गांव में प्रशिक्षु पायलट विनय कुमार उर्फ छोटू के मकान पर छापा मारा। वहां से उसे उन्हीं बैगों में सवा चार करोड़ रुपये की रकम मिली, जिनमें फिरौती दी गई थी।
पुलिस को उसके घर से हथियार भी मिले हैं। गिरफ्तार आरोपियों में प्रशिक्षु पायलट विनय के पिता ईश कुमार सेना से सेवानिवृत्त हैं। उससे हुई पूछताछ के आधार पर कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र के श्रद्धापुरी फेज दो से मुख्य आरोपी (शिक्षक के बेटे) अंशुल बाबरा और संदीप राठी को गिरफ्तार किया गया। अंशुल के पिता महेंद्र सिंह बावरा शिक्षक हैं। महेंद्र को 2009 में राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। अंशुल के साथ मेरठ के श्रद्धापुरी निवासी कपिल जाट भी साजिश का मास्टर माइंड रहा है।
पुलिस ने मेरठ के न्यू सैनिक नगर निवासी आकाश, सरधना के सोमवीर, शिवलोकपुरी के अंशुल और ग्रेटर नोएडा के नगला-नगली निवासी दीपक को भी गिरफ्तार किया है। शिवलोकपुरी के अंशुल के पिता सिपाही हैं और ग्रेटर नोएडा में तैनात हैं। एक अन्य आरोपी सोनी सहित छह बदमाश अब भी फरार हैं। पुलिस के मुताबिक, सोनी की महिला मित्र कपिल के यहां नौकरी करती थी, उसी ने कपिल के बारे में गिरोह को पूरी जानकारी दी थी। एसएसपी नोएडा ज्योति नारायण ने बताया कि पुलिसिया कार्रवाई की सूचना बदमाशों तक पहुंच रही थी, इसकी जांच की जा रही है।
खुल गई पुलिस के झूठ की पोल
कपिल अपहरण कांड के खुलासे ने पुलिस के झूठ की पोल खोल दी है। उद्योगपति के परिजन भी शुरू से ही अपहरण की बात को छुपा रहे थे। पुलिस ने पहले कपिल की पत्नी सोनिया को आगे कर मीडिया को उनके लापता होने की जानकारी दी। फिरौती देकर कपिल के वापस आने के बाद भी परिजन और पुलिस चुप्पी साधे रहे थे।
जब मीडिया ने इस बात को संज्ञान में लिया और मामले को उठाया तब जाकर 28 सितंबर को पुलिस ने फिरौती के लिए अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। वहीं दूसरी तरफ नोएडा पुलिस इस बात से भी इंकार कर रही थी कि पहले अपहरण और फिरौती देकर उद्यमी के छूडाया गया है।












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