इच्छा मृत्यु मांगने वाली अलका का इलाज एम्स में होगा

ज्ञात हो कि कानपुर के परमट इलाके में रहने वाली इक्कीस वर्षीय अलका प्लास्टिक एनीमिया से पीडि़त है। चिकित्सकों का कहना है कि उसे बचाने के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट करना होगा जिसके लिए 20 लाख का खर्च आएगा। सड़क किनारे झोपड़ी में रहने वाली अलका के परिजनों के पास इतना पैसा नहीं था।
आर्थिक दशा ठीक न होने के कारण उसने जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी कानपुर के सामने इच्छा मृत्य की मंशा जाहिर की मांग रखी तो सभी के होश उड़ गए। मामला धीरे-धीरे अदालत तक पहुंच गया। पीडि़त ने अदालत में गुहार लगायी कि उसका इलाज सरकार कराए अन्यथा उसे मौत दी जाए।
अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकार को निर्देश दिया था कि अलका के इलाज के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराया जाए अन्यथा उसकी मांग पर विचार किया जाए। मामले की जानकारी मीडिया तक पहुंचते ही अलका रातों-रात यूपी की मीडिया में छा गयी। इसके बाद बसपा के राज्यसभा सांसद गंगाचरण राजपूत ने उसके इलाज का आश्वासन देते हुए उसे लखनऊ के संजय गांधी पीजीआई चिकित्सालय में भर्ती कराया।
राजपूत ने अलका के परिजनों को आश्वासन दिया कि उसका इलाज कराया जाएगा उन्होंने सांसद निधि से धन देकर उसके इलाज की हामी भरी। उनका कहना था कि यदि पीजीआई में अलका का इलाज न हुआ तो उसे एम्स ले जाया जाएगा। पीजीआई के चिकित्सकों की इजाजत पर अब अलका को एम्स ले जाने की तैयारी हो रही है।
दूसरी ओर जब बसपा नेता की ओर से अलका के लिए कुछ करने की बात केन्द्रीय कोयला मंत्री व कानपुर के सांसद श्रीप्रकाश जायसवाल का पता चली तो उन्होंने भी अलका के मदद की गुजारिश कर दी। जायसवाल ने तत्काल केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद से अलका के इलाज में सहयोग देने की बात कही। फिलहाल सांसदों की पहल पर अब एयर एंबुलेस से अलका को दिल्ली के एम्स में भर्ती कराने ले जाया जाएगा। कल तक पैसों के आभाव में मौत की मांग करने वाली अलका अब जीना चाहती है उसे लगने लगा है कि अब वह जल्द ही ठीक हो जाएगी।












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