पोलियो ड्राप न पीने वालों में आगरा अव्वल: डब्ल्यूएचओ

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि ताजनगरी आगरा में पोलियो ड्राप पिलाने से परहेज करने वालों में आगरा के अल्पसंख्यक समाज के लोग पहले नम्बर पर हैं। रिपोर्ट बताती है कि लोग को इस बात डर सता रहा है कि यदि वह अपने बच्चों को दवा पिलाते हैं तो बच्चों नार्मदी पैदा हो जाएगी। यह बात सबसे अधिक अल्पसंख्यक समाज में है। यह हकीकत जानने के बाद भारत सरकार तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन दोनों की परेशानी बढ़ी हुई हैं। हालांकि डब्लूएचओ कार्यकर्ताओं ने इस दिशा में प्रयास किए लेकिन उसका कोई परिणाम नहीं निकला।
सरकार का कहना है कि पोलियो को जड़ से मिटाने के लिए प्रत्येक साल करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं ऐसे में यदि सभी बच्चे दवा नहीं पीते हैं तो अभियान का कोई असर नहीं पड़ेगा। देश के सत्तर फीसदी मुसलमानों में आज भी पोलियो अभियान के प्रति नकारात्मक सोच बनी हुई है। यूनीसेफ तथा डब्ल्यू.एच.ओ. की ओर से अल्पसंख्यकों के इलाकों में मुस्लिम चिकित्सकों की अपील वाले विज्ञापन व पर्चों का वितरण किया जा रहा है ताकि पोलियों के प्रति लोग अधिक से अधिक जागरुक हों।
सरोजनी नायडू मेडिकल कालेज के पूर्व प्राचार्य डा. ग्यासुद्दीन कुरैशी हकीम काजी अशफाक अहमद, डा. सिद्दीकी अकरम, डा. लताफत अली और हकीम सैयद बुरहान आदि से अपील कराई गयी है। आगामी 25 सितम्बर से शुरु होने वाले पोलियो अभियान में मुस्लिम क्षेत्र में मुस्लिम वैक्सीनेटर रखे जा रहे हैं जो लोगों को इसकी विधिवत जानकारी देंगे। इसके अलावा अलीगढ में जवाहर लाल नेहरु मेडिकल कालेज की बाल रोग विशेषज्ञ तथा चेयरमैन डा. तवस्सुम शहाब से अलीगढ के अल्पसंख्यक समुदाय के लिए अपील छपवाकर बांटी जा रही है।












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