दिल की दवा से आतंकियों ने किया दिल्ली के दिल पर हमला

इस रसायन के बारे में आपको बता दें कि यह केमिकल हृदय संबंधी परेशानियों में रक्त संचार को सुचारु बनाने के लिये भी इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन नाइट्रेट के साथ इस केमिकल का कॉकटेल इस घातक विस्फोटक के रूप में तब्दील कर देता है। गौरतलब है कि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी की सेना ने इस केमिकल को विस्फोटक के रूप में इस्तमाल किया था। उसके बाद से यह रसायन आतंकियों का पसंदीदा हथियार बन गई। लश्कर-ए-तैयबा, इंडियन मुजाहिद्दीन, अलकायदा और हुजी इसका धडल्ले से इस्तमाल कर रहे हैं।
पीईटीएन (पेंटाएरिथ्रिटॉल ट्राइनाइट्रेट) रसायन की सबसे बडी़ खूबी यह है कि इसकी पहचान जल्दी से नहीं हो पाती। इसे स्वतंत्र रूप से इस्तमाल भी नहीं किया जा सकता। नाइट्रेट (अमोनियम या फिर पोटैशियम) के साथ इसका इस्तमाल धमाके का असर व्यापक कर देता है। जांच एजेंसियों की मानें तो वाराणसी में हुए बम धमाकों में भी इसका प्रयोग किया गया था। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि आतंकियों ने दिल की दवा को आतंक का खिलौना बनाया और फिर मौत का खूनी खेला।












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