मां और ममता की छांव से दूर ही रहेगा बेटा

Legal complexity blocks union of cow and calf
नई दिल्ली। दो महीने से मां से बिछड़ा बछड़े को अपनी मां से मिलना हाल फिलहाल में नहीं हो पाएगा। अदालत की पहल के बाद उम्मीद जगी थी कि शायद बछड़े को जल्द मां मिल जाए, लेकिन मामला कानूनी दांव पेंच में फंस गया है। अब गाय का मालिक ऊपरी अदालत में जाने की तैयारी कर रहा है। तीस हजारी अदालत स्थित मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट विनोद यादव की अदालत में सोमवार को गाय और बछड़े को पेश करने के आदेश दिए थे।

मां की चाह में बछड़ा अदालत तो पहुंच गया, लेकिन गौशाला के अधिकारी गाय लेकर अदालत नहीं पहुंचे। एमसीडी की ओर से पेश हुईं अधिवक्ता मधु तेवतिया ने अदालत में दलील दी कि धारा 137 के तहत गाय का पंजीकरण कराना जरूरी होता है। जिस गाय का पंजीकरण है, उसी गाय को धारा 418 के तहत छोड़ा जा सकता है। यही नहीं हाईकोर्ट के 31 मई-2007 के आदेश का जिक्र भी किया।

जिसमें इस संदर्भ में स्पष्ट आदेश जारी किए गए थे। जिसके बाद अदालत ने गाय के मालिक वेद प्रकाश से कहा कि बछड़े को भी गौशाला में भेज दो ताकि बछड़ा मां से मिल सके। लेकिन उसने बछड़ा गौशाला में देने से इनकार कर दिया। जिसके बाद अदालत ने बछड़े को दिल्ली से बाहर रखने की बात कही। तब वेद प्रकाश ने कहा कि वह बछड़े को दिल्ली से बाहर अपने रिश्तेदार के यहां भेज देगा। इस प्रकार कानूनी दाव-पेंच में उलझ कर रह गया बछड़े का मां से मिलन।

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