एक छत के नीचे साथ-साथ रहते हैं सांप और इंसान

प्रदेश के देवरिया जिले में रहने वाली कमलावती के परिवार की कहानी यही है। गरीबी रेखा से नीचे का जीवनयापन करने वाली कमलावती बताती है कि पिछले चार सालों के दौरान उनके घर में करीब चार हजार सांप निकल चुके हैं। पहले तो बहुत डर लगता था लेकिन धीरे-धीरे आदत हो गयी। ऐसा नहीं है कि इस परिवार को सांपों से डर नहीं लगता लेकिन गरीबीवश कोई दूसरा मकान न ले पाने की स्थिति इस डर पर हावी रही।
इस परिवार का कहना है कि चार वर्ष पूर्व जब पहली बार कई सांप निकले तो यह सोचकर की किसी सांप ने अंडे दिये होंगे, टाल गये लेकिन यह क्रम रूका नहीं और लगातार सांपों का निकलना जारी रहा। सांपों से भयभीत इस परिवार ने काफी पूजा-पाठ करायी। सर्प दोष शान्ति का हवन भी कराया लेकिन सांपों के निकले का सिलसिला थमा नहीं। संापों से आतंकित परिवार ने कई बार इस घर को छोडऩे की कोशिश की। गरीबी के कारण दूसरा घर नहीं ले सके और पूरे गांव में सांपों के घर के नाम से प्रसिद्घ इस घर का कोई खरीददार भी नहीं मिला।
हजारों की संख्या में सांपो के निकलने के बावजूद ताज्जुब की बात यह है कि सांपों से किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ। न सांप ने किसी को काटा और न कोई अन्य घटना हुई। यही कारण है कि यह परिवार अब इन सांपों से भय नहीं खाता। यह घटना उनके लिए आम हो गयी है लेकिन सुनने वालों के लिए आज भी कौतुहल का विषय है। गांव वालों का कहना है कि सांप सिर्फ इसी परिवार के घर में ही निकलते हैं यहां तक की पड़ोस के घरों में भी कभी ऐसी घटना नहीं घटी।












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