महाभियोग से बच निकले जस्टिस सौमित्र सेन

जस्टिस सेन पर रिश्वत का मामला चल रहा था। इसके बाद अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती ने उनके खिलाफ महाभियोग चलाने की सिफारिश की थी। जिस पर राज्यसभा ने अपनी मुहर लगा दी थी। जस्टिस सेन ने पहले अपना इस्तीफा फैक्स के माध्यम से राष्ट्रपति को सौंपा था। जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार नहीं किया था। इसके बाद जस्टिस सेन ने लिखित में अपने हस्ताक्षर वाला इस्तीफा राष्ट्रपति को सौंपा जिसे स्वीकार कर लिया गया।
जस्टिस सेन तीसरे ऐसे जस्टिस हैं जिन्होंने महाभियोग का मामला पूरा होने से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया हो। भारतीय संविधान के अनुसार किसी जस्टिस को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों की मंजूरी ली जाती है। जिसके बाद इस पर अंतिम फैसला राष्ट्रपति ही करता है। भारतीय इतिहास में हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के किसी भी जज के महाभियोग का मामला संसद के दोनों सदनों से पास होकर राष्ट्रपति तक नहीं पहुंचा है। यह प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही महाभियोग से बचने के लिए जस्टिस पद पर तैनात उक्त व्यक्ति ने इस्तीफा दे दिया है।












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