भारत की ओर मिसाइलें तैनात कर क्या दिखाना चाहता है चीन?
अमेरिका में छपी एक खबर के मुताबिक चीन ने भारतीय सीमा पर सीएसएस-5 एमआरबीएम मिसाइलें तैनात की हैं। चीन के इस कदम के पीछे क्या सोच है इसका पता अभी नहीं चल पाया है। हो सकता है उसे यह डर सता रहा हो की चीन के कब्जे में कश्मीर को जो हिस्सा है उस पर कहीं भारत की नजर तो नहीं है। इस बाबत पैंटागन ने भारत को आगाह करते हुए कहा है कि चीन ने जो मिलसाइलें भारत की तरफ तैनात की हैं उनकी मारकक्षमता बहुत अधिक है।
भारत और चीन में सीमा को लेकर आए दिन विवाद चलता रहता है। चीन ने भारतीय सीमाओ पर कब्जा जमाने के लिए नई तरह की रणनीति अपनाई है। उसने सीमा के आस-पास के इलाकों में सड़कें पक्की बनाकर ज्यादा से ज्यादा सेना तैनात करने का प्लान बना रखा है। देखा जाए चीन पहले भी इस तरह की तैयारियां करता रहा है। मार्च 2011 में भारत हथियारों का जखीरा खरीदने वाला नंबर 1 देश बन गया था वहीं चीन उस समय दूसरे नंबर था दक्षिण कोरिया तीसरे और पाकिस्तान का नंबर चौथा था हाल के दिनों में चीन ने पाकिस्तान को भी काफी मद्द पहुचाई थी। कहीं चीन को इस बात का डर तो नहीं सता रहा है कि भारत का दवाब उसके उपर ज्यादा न बढ़ जाए जो भविष्य में उसके लिए खतरा उत्पन्न करें।
अप्रेल 2011 में एलओसी पर चीन ने अपने सैनिको को इक्ट्ठा करना शरू कर दिया था। जिससे यह क्यास लगाए जा रहे है कि भारत और चीन में सीमा को लेकर विवाद बढ़ गया है, हाल कि घटनाओं को देखते हुए भारतीय सेना के एक उच्च अधिकारी ने एक खास सूचना देते हुए देश को चीन से सावधान रहने के लिए चेताया है। भारतीय सेना के जनरल ने बताया है कि चीनी सेना की टुकड़ियां धीरे-धीरे चीन और भारत की सीमा लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर इकट्ठा रही हैं। आशंका जताई जा रही है कि चीनी सैनिक जल्द ही भारत-पाक सीमा या लाइन ऑफ कंट्रोल पर कब्जा जमा सकते हैं, जो भारत की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है।
चीन दिन पर दिन अपनी सेना में भी बढ़ोत्तरी कर रहा है चीन ने अपने मिसाइल बेडे़ में हवा से हवा में मार करने वाली को शामिल किया है। इसकी मारक क्षमता भी काफी अधिक है । अखबार ने इस बारे में जानकारी देते हुए लिखा है, चीन ने इस नई मिसाइल के निर्माण में किसी की बाहर से मदद नहीं ली है और ना ही इसमें किसी दूसरे देश की तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। अखबार ने अपनी रिपोर्ट मे लिखा है, इस मिसाइल से चीन को एक और ट्रंप कार्ड मिल गया है और ये मिसाइल न सिर्फ चीन का वर्चस्व बढ़ाएगी बल्कि सेना की क्षमता में भी इजाफा हो गया है जो भारत के लिए चिंता का सबब है।
हवा से हवा में मार करने वाली चीन की मिसाइल को एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। उपरी तौर पर देखा जाए भारत और चीन के संबधों में सुधार बना हुआ है मगर दोनों देशों में सीमाओं के मसले को लेकर मतभेद जारी है हाल ही में एक साल के अंतराल के बाद भारतीय सैन्य प्रतिनिधि मंडल चीन जा रहा है। ऐसे में चीन की कोशिश है कि वह भारत के साथ अपने सैन्य सहयोग को और बढ़ाए। इसके लिए दोनों देशों के बीच वार्ता भी होगी।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हांग लियो ने भारतीय प्रतिनिधि मंडल के चीन दौरे के बारे में पूछे जाने पर बताया कि सैन्य समझौता भारत और चीन के संबंधों का मुख्य आधार है। ऐसे में हम चाहेंगे कि दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ाया जाए। उम्मीद की जा सकती है कि इस वार्ता से भविष्य में भारत और चीन के संबधों में और मधुरता आएगी।













Click it and Unblock the Notifications