दिल्ली: असली मां-बाप को मिल गई बच्ची
गार्जियन जज संजय शर्मा की अदालत ने रोहिणी निवासी तेजिंदर शर्मा और रेनु शर्मा की अर्जी पर सुनवाई के बाद यह निर्णय सुनाया है। दंपति ने 11 वर्षीय बच्ची को वापस लेने और उसकी संपत्ति का संरक्षक बनने के लिए कोर्ट की शरण ली थी। बच्ची के पिता सेल्स मैनेजर व माता गृहिणी हैं। लिहाजा बच्ची मानवी को शिक्षा व तरक्की के लिए एक अच्छा माहौल मिलेगा। बच्ची के दादा दादी ने भी इस बात पर कोई ऐतराज नहीं किया। मामले के अनुसार मानवी का जन्म 27 जून 1996 को हुआ था। मानवी के अलावा दंपति की दो बेटियां कनिका व मलिका भी हैं। मानवी को 14 फरवरी 1997 को अशोक गौर व सुमन गौर को गोद दे दिया था।
सुमन गौर व रेनु शर्मा सगी बहने हैं। सगे संबंधी होने के नाते मानवी के असल माता-पिता उससे मिलते जुलते रहते थे। दुर्भाग्यवश सुमनगर का 01 मार्च 2011 को निधन हो गया। इसके डेढ़ माह बाद 17अप्रैल 2011 को अशोक गौर का भी निधन हो गया। उधर रोजमर्रा के खर्च के लिए परेशान एक बेटी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। बेटी ने पिता से गुजाराभत्ता दिलाने की मांग की है। लेकिन पिता उसे खर्च देने से इंकार कर रहा है। दरअसल, लड़की अपनी मां की हत्या के मामले में पिता के खिलाफ गवाह है। मंगलवार को मामले की सुनवाई कड़कड़डूमा की एमएम शुचि ललेर की अदालत में होगी।
बाबर पुर निवासी एक युवती ने अपने पिता के खिलाफ अदालत की शरण ली है। अपने ननिहाल में रहकर पढ़ाई कर रही युवती ने पिता से 10 हजार रुपये महीना गुजाराभत्ते की मांग की है। अदालत में दायर अर्जी में कहा है कि उसके पिता ने कभी उसकी पढ़ाई लिखाई और खाने पीने का खर्च नहीं दिया। शुरू से ही उसके नाना ने उसका खर्च उठाया। उसके पिता को वायुसेना से पांच हजार रुपये पेंशन और मेट्रो रेल में नौकरी से 13 हजार का वेतन मिलता है। अन्य स्रोतों से उसे 30 हजार की आमदनी होती है।
मामले के मुताबिक, युवती के पिता ने 02 दिसंबर 2007 को उसकी मां की हत्या कर दी। मुकदमा बागपत में चल रहा है। मामले में वह अपने पिता के खिलाफ गवाह है और इसी कारण से आरोपी अपनी बेटी को खर्चा देने से इंकार कर रहा है।













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