अन्ना के पहले अनशन में हुई थी हिंसा

1989 में पहली बार अन्ना अपने गांव रालेगांव सिद्धि में बिजली की समस्या के कारण अनशन पर बैठे। 28 नवंबर, 1989 को शुरू हुए उस अनशन के दौरान एक सप्ताह बाद सेहत बिगड़ने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। पर सरकार झुकी नहीं और ही ध्यान दिया। इसके बाद अन्ना के समर्थन में तीन तहसीलों के किसान सड़कों पर उतर आए। यह आंदोलन उग्र होने पर पुलिस को गोलियां चलानी पड़ी, जिसमें चार किसान की मौत हो गई। उसके बाद सरकार की नींद खुली और क्षेत्र की बिजली समस्या का निदान हुआ।
1992 में महाराष्ट्र के गांवों का दौरा करते हुए अन्ना को राज्य के दो मंत्रियों द्वारा योजनाबद्ध तरीके से सरकारी धन की लूट की खबर पता चली। उन्होंने इन मंत्रियों की शिकायत की पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उसके बाद अन्ना ने अनशन शुरू कर दिया। दस दिन चले अनशन के बाद सरकार ने मंत्रियों के विरुद्ध जांच शुरू करवाई। जांच में दोषी पाए जाने के बाद दोनों मंत्रियों को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी।
1999 में महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा सरकार के दौरान अन्ना ने समाज कल्याण मंत्री बबनराव घोलप के भ्रष्टाचार के सबूत मुख्यमंत्री को सौंपे। मनोहर जोशी ने उन सबूतों के आधार पर मंत्री पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। एक स्थानीय अखबार में इस संबंध में खबर छपने के बाद घोलप ने अन्ना के विरुद्ध मानहानि का मुकदमा कर दिया। दोषी पाए जाने पर अदालत ने अन्ना को इस आशय का शपथपत्र देने को कहा कि वह भविष्य में इस तरह के आरोप किसी पर नहीं लगाएंगे। अन्ना ने यह शपथपत्र देने के बजाय जेल जाना स्वीकार किया। बाद में हाईकोर्ट ने घोलप के मुकदमे को खारिज कर दिया और राज्य सरकार ने मंत्री महोदय के खिलाफ जांच के आदेश दिए।
वर्ष 2003 में कांग्रेस-राकांपा सरकार के चार मंत्रियों के विरुद्ध अन्ना ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उनकी जांच के लिए वह मुंबई के आजाद मैदान में अनशन पर बैठे। एक तरफ अन्ना चार मंत्रियों के विरुद्ध जांच के लिए अनशन कर रहे थे, दूसरी ओर उसी आजाद मैदान में उन्हीं में से एक मंत्री सुरेशदादा जैन भी अन्ना के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए अनशन पर बैठ गए। नौ दिन तक चले अन्ना के अनशन के बाद सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश पीबी सावंत की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन कर दोनों पक्षों के आरोपों की जांच का निर्देश दिया। जांच में चार में से तीन मंत्री भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए।
अब 15वां अनशन उनका जनलोकपाल बिल को लेकर है जो अभी भी जारी है।












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