केवल अपने दिल की सुनते हैं अन्ना

Anna follow his heart only
नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे केवल अपनी दिल की सुनते हैं। यहां तक कि अपनी टीम के सदस्यों की बातों को भी वे कभी कभी नकार जाते हैं। आपको बता दें कि तिहाड़ जेल में रुककर सरकार को झुकाने का फैसला खुद उनका था। जबकि टीम नहीं चाहती थी कि वे जेल में रहे पर उन्होंने इस मुद्दे पर किसी की भी नहीं सुने।

गौरतलब है कि मंगलवार की रात जब दिल्ली पुलिस ने उनकी रिहाई का फरमान जारी की तो टीम अन्ना की राय थी कि अब अन्ना को तिहाड़ जेल से बाहर आ जाना चाहिए। यही नहीं अपने इस फैसले के बारे में अन्ना हजारे को बताया भी पर अन्ना जिद पर अड़ गए और कहा कि यह क्या मतलब है कि जब किसी को चाहे बंद कर दो और जब चाहे किसी को छोड़ दो। अब मैं बाहर उसी समय आउंगा जब सरकार मुझे अनशन की छूट दे देगी और वह भी मेरी शर्तों पर। ऐसा ही मौका अप्रैल में हुए अनशन के दौरान भी आया था। तब कपिल सिब्बल के साथ साझा मसौदा समिति के गठन पर टीम अन्ना की बातचीत चल रही थी।

सरकार ने गजट अधिसूचना तक के लिए सहमति दे दी थी। पूरी टीम का साफ मानना था कि अब अन्ना को अनशन खत्म कर देना चाहिए, लेकिन अन्ना ने साफ कर दिया कि जब तक समिति का अध्यक्ष गैर सरकारी नहीं होता, वे नहीं मानने वाले। आखिर में टीम के अनुभवी सदस्य शांति भूषण को उन्हें मनाने के लिए ऐसे दाव चलने पड़े, जिससे माहौल बेहद भावुक हो उठा। फिर भी अन्ना ने अनशन अगली सुबह ही तोड़ा।

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