दिल्ली से गठबंधन नीति के इंतजार में भाजपा व कांग्रेस

भारतीय जनता पार्टी एवं कांग्रेस के कैडर ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के लिये जल्द से जल्द प्रत्याशी घोषित करने की मांग करनी शुरू कर दी है। ज्ञात हो कि बसपा तथा सपा पहले ही प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर चुके हैं। सपा बसपा की कार्यप्रणाली को देख रहे भाजपा एवं कांग्रेस के सदस्यों ने पार्टी नेतृत्व पर दबाव बनाना शुरु कर दिया है कि वह पार्टी के प्रत्याशी तय कर दें ताकि सदस्यों को चुनाव प्रचार के लिए भरपूर समय मिल जाए।
हालांकि पार्टी पदाधिकारियों ने यह आश्वासन दे रखा है कि इस माह के अंत तक प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी जाएगी। सूत्रों की माने तो सूची में हो रही देरी का मुख्य कारण यह है कि प्रदेश इकाई केन्द्रीय नेतृत्व की गठबंधन नीति का इंतजार कर रही है इसके बाद ही प्रत्याशियों के बारे में अंतिम फैसला लिया जायेगा। कोई भी यह नहीं चाहता है कि एक बार उम्मीदवार तय कर दिए जाएं तथा बाद में गठबंधन हो तथा मजबूरन उम्मीदवारों के नाम हटाने पड़े।
भाजपा ने तो गठबंधन के मुददे पर खुलकर कुछ नहीं बोला लेकिन कांग्रेस ने इस बात के संकेत दिए हैं वह छोटे दलों के साथ चुनावी समझौता कर सकती है। दूसरी ओर बसपा व सपा के कई नेता यह कहने लगे हैं कि दोनों ही राष्ट्रीय दलों के पास अच्छे प्रत्याशी हैं ही नहीं इसलिए ये दल दूसरे दलों से पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं का इंतजार कर रहे हैं। सपा नेताओं का कहना है कि पार्टी 403 में से 348 प्रत्याशी घोषित कर चुकी हैं और शेष की घोषणा माह के अंत तक कर दी जायेगी। हालांकि भाजपा के नेता भी लगाकार अपने सदस्यों को यह समझाने में लगे हैं कि माह के अन्त तक सूची जारी कर दी जिसके लिए चयन प्रक्रिया तेजी से चल रही है।












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