गुडग़ांव पर नोएडा का असर, फ्लैटों की बुकिंग बंद, बिल्डर परेशान

बिल्डर अपने गुर्गो द्वारा स्थिति भांपने में लगे थे अब क्या होगा प्रोजेक्ट ही पिट जाएगा। उधर चिलचिलाती गर्मी में महिलाएं दहाड़-दहाड़कर कह रही थीं कि बिल्डर गांव में आकर देखें हमारी छाती के ऊपर से बुल्डोजर उतर सकता है लेकिन चल नहीं सकता। महिलायें यह भी कह रहीं थीं कि जमीन हमारी गई, बच्चे हमारे बेरोजगार हुए, खाने के लिये दाने नहीं अब कहां जाएं हम।
गाड़ौली में इस बात पर भी जोर दिया कि सैक्शन 4/6 के नोटिस हो जाते हैं और फिर बिल्डर अपना दबदबा दिखाकर यह कहने से नहीं चुकते कि सरकार अधिग्रहण करेगी हमें जमीन दे दो हम निपट लेंगे। इस प्रकार वे किसानों का शोषण कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि सरकार ने समय रहते उनके हित में कोई फैसला नहीं लिया तो गुडग़ांव यूपी के भट्टा पारसौल का इतिहास दौहरायेगा।
किसान भूमि अधिग्रहण नीति के साथ-साथ इस बात से भी नाराज चल रह हैं कि किसानों की बेशकीमती जमीन सरकार ने अधिग्रहण करके बिल्डरों को मौटे मुनाफे में बेच डाली। उन्हें इसके बदले रोजगार का लालच दिया गया। जो कि वादा ही रहा। यहां रोजगार के लिये लगाये जाने वाले उद्योगों की जगह बड़ी-बड़ी बिल्डिंग बनाई जा रही है। अब किसान सरकार की भूमि अधिग्रहण नीति के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लडऩे के मूड में आ चुके हैं।












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