एनसीपी को गृहमंत्रालय देना कांग्रेस की भूल थी: पृथ्वीराज चव्हाण

मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद राज्य में गठबंधन की सरकार वाली पार्टियों कांग्रेस और एनसीपी के बीच दरारें पड़नी शुरू हो गई हैं। राज्य सरकार में कांग्रेस के पास मुख्यमंत्री पद है और गृहमंत्रालय एनसीपी के पास है। इससे पहले जब 2008 में मुंबई में 26/11 का आतंकी हमला हुआ था तब भी गृहमंत्रालय नएसीपी के ही पास था। उस समय आरआर पाटिल राज्य के गृहमंत्री थे। इस हमले के बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। 13 जुलाई को हुए बम धमाकों के बाद भी उनके इस्तीफे की मांगें उठने लगी हैं।
पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन में गृहमंत्रालय एनसीपी को देने का कांसेप्ट शिवसेना और बीजेपी के गठबंधन से लिया गया है। 1995-1999 तक इस गठबंधन में भी ऐसा ही था। एक पार्टी के पास मुख्यमंत्री की सीट थी तो एक पार्टी के पास गृहमंत्रालय था। उन्होंने कहा कि मुंबई में हो रहे आतंकी हमलो को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। गठबंधन की वजह से इसमें कोई ठील नहीं दी जाएगी।
इस बार हालात पिछले आतंकी हमले से अलग हैं। सूत्रों के मुताबिक उस समय गृहमंत्री आरआर पाटिल ने नैतिकता के आधार पर इसलिए इस्तीफा दिया था कि वे उस समय के मुख्यमंत्री बिलासरवा देशमुख पर भी इस्तीफे का दबाव बना सकें। आरआर पाटिल के इस्तीफे के बाद बिलासराव देशमुख को भी इस्तीफा देना पड़ा था। इस समय मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के इस्तीफे की उम्मीद न के बराबर है। इसलिए एनसीपी के उम्मीदवार और गृहमंत्री आरआर पाटिल भी इस्तीफे की पेशकश नहीं करेंगे।












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