नए सीवीसी की नियुक्ति पर थॉमस ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा

थॉमस के वकील विल्स मैथ्यूज ने कहा कि इसका मुख्य आधार यह है कि फैसला न्यायाधीशों की तीन सदस्यीय पीठ ने किया। हम संविधान के उस प्रावधान का समर्थन कर रहे हैं कि यह पांच न्यायाधीशों वाली पीठ होनी चाहिए थी।
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने तीन मार्च को सीवीसी के रूप में थॉमस की नियुक्ति को रद्द कर दिया था क्योंकि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले में आरोप पत्र लंबित था। थॉमस सितंबर 2010 में सीवीसी के रूप में नियुक्त किए गए थे। उन्होंने कहा कि थॉमस की नियुक्ति का वारंट केवल उक्त फैसले के आधार पर रद्द कर दिया गया, जबकि फैसले की वैधता अपने आप में विवादास्पद है। हमारा विचार है कि फैसले की वैधता पर पहुंचने के बाद ही नए सीवीसी की नियुक्ति पर प्रतिवादी को आगे बढऩा चाहिए।
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