गुरुदास कामत ने छोड़ा पद

गौरतलब है कि कांग्रेस और सरकार ने अपने निर्णायक मंत्रिमंडल विस्तार में राजनीतिक संतुलन साधने की खूब कोशिश की पर उसे अपने ही लोगों के असंतोष का सामना करना पड़ा। यूपीए-2 सरकार के दूसरे मंत्रिमंडल विस्तार में विभाग और रुतबा अपेक्षानुसार न बढ़ने से नाराज गुरुदास कामत और श्रीकांत जेना ने शपथग्रहण समारोह का बहिष्कार कर दिया। हालांकि इस पर प्रधानमंत्री ने कहा, नाखुश तो लोग होंगे, लेकिन उन्हें देशहित के बारे में सोचना चाहिए। मंत्रिमंडल विस्तार में हमने सिर्फ इसी बात को ध्यान रखा।
फेरबदल से सबसे ज्यादा क्षुब्ध श्रीकांत जेना और गुरुदास कामत रहे। इन दोनों को स्वतंत्र प्रभार देकर तकनीकी रूप से तो पदोन्नत किया गया था, लेकिन कम महत्व के विभागों की वजह से दोनों को यह तौहीन लगी। मंत्रिमंडल फेरबदल में कामत को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाकर नया मंत्रालय पेयजल व स्वच्छता दिया गया था, लेकिन कामत कैबिनेट मंत्री बनना चाहते थे।
जेना का शिकायत यह रहा है कि 1996 की संयुक्त मोर्चा सरकार में वह कैबिनेट मंत्री थे, जबकि यूपीए ने उन्हें राज्यमंत्री बनाया। इस वर्ष जनवरी में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में कामत भी दूरसंचार राज्य मंत्रालय छिनने से क्षुब्ध थे। तब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें गृह राज्यमंत्री के साथ-साथ दूरसंचार भी दे दिया था। इस दफा दोनों नेताओं ने शपथग्रहण समारोह का बहिष्कार कर दिया। समारोह से ठीक पहले कामथ के दिल्ली से मुंबई जाने पर कांग्रेस आलाकमान ने सख्त रुख अपनाया। उनसे मंत्री पद छोड़ने को कह दिया गया।
आलाकमान के सख्त तेवरों को देखते हुए कामत के बल ढीले पड़े और उन्होंने बयान जारी कर मंत्री पद से अपने इस्तीफे का ऐलान कर किया। उन्होंने सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के प्रति भरपूर सम्मान दर्शाते हुए कहा कि मैंने आज सवेरे ही प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष से मंत्री पद से मुक्त कर बतौर कार्यकर्ता काम करने देने की गुजारिश की थी। आपको बता दें कि गुरुदास कामत महाराष्ट्र के कद्दावर नेता हैं और वे लगातार पांचवीं बार मुंबई के सांसद चुनकर आए हैं। कामत का इस्तीफा कांग्रेस के लिए एक झटका माना जा रहा है।












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