2जी स्पेक्ट्रम: सुप्रीम कोर्ट से सिब्बल को मिली राहत

सूत्रों ने बताया कि 2जी मामले की निगरानी कर रही न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी व न्यायमूर्ति एके गांगुली की पीठ ने कहा कि इस मामले में आदेश पारित करने की कोई जरूरत नहीं है। हालांकि जब केंद्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रोहिंग्टन नरीमन ने कहा कि गैर सरकार संगठन सीपीआईएल के आरोप लगाने वाले हलफनामे को कोर्ट रिकार्ड पर न ले तो पीठ ने कहा कि हलफनामा रिकार्ड पर आ चुका है।
गैर सरकारी संगठन सीपीआईएल ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर आरोप लगाया था कि दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन को अनुचित लाभ पहुंचाते हुए उस पर लगी 50 करोड़ की पेनाल्टी को घटाकर 5 करोड़ कर दी थी। सोमवार को याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि रिलायंस कम्युनिकेशन ने बिना किसी नोटिस के सेवाएं बंद कर दीं थीं। सेवाएं ठप करना लाइसेंस की शर्तो का उल्लंघन है। इसीलिए दूरसंचार विभाग की यूएसओएफ शाखा ने
रिलायंस को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 50 करोड़ की पेनाल्टी लगाने की संस्तुति की थी। एडवाइजर फाइनेंस व मेंबर फाइनेंस ने भी इसे मंजूरी दे दी थी, लेकिन सिब्बल ने 18 फरवरी तक फाइल रोके रखी। इस बीच 16 फरवरी को रिलायंस की ओर से उन्हें पत्र भेजा गया। उस पत्र के आधार पर दूरसंचार मंत्री ने रिलायंस को सेवा बंद करने का दोषी मानने के बजाय सिर्फ सेवा बाधित करने का दोषी माना, जिसका परिणाम हुआ कि रिलायंस पर लगी 50 करोड़ की पेनाल्टी घटकर 5 करोड़ हो गई। भूषण की मांग थी कि सिब्बल के इस फैसले की जांच सीबीआई से कराई जाए।












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