कालका की राख पर राजनीतिक रोटियां सेकने पहुंचे राहुल गांधी

Rahul Gandhi meets train accident victims
कानपुर। कांग्रेस के युवराज और अमेठी के सांसद राहुल गांधी आज फतेहपुर के निकट मलवा में हुए कालका मेल हादसे में घायल हुए लोगों के घावों पर मरहम लगाने के लिये कानपुर पहुंचे। राहुल गांधी कानपुर स्थित हैलेट अस्‍पताल जाकर घायलों का हालचाल लिया और उन्‍हें उचित सहयोग उपलब्‍ध कराने का भरोसा दिलाया। सच पूछिए तो यह कालका की जलती राख पर राजनीतिक रोटियां सेकने जैसा ही है।

मालूम हो कि कालका मेल हादसे में लगभग 70 लोगों की मौत हो गई थी और 250 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गये थे।

राहुल गांधी जैसे ही हैलेट अस्‍पताल पहुंचे मीडियाकर्मियों ने उन्‍हें घेर लिया और सवालों की बौछार कर दी। मगर शीलू प्रकरण की तरह इस बार भी मीडियाकर्मियों को निराशा ही हाथ लगी। राहुल गांधी ने किसी भी सवाल का कोई जबाब नहीं दिया अलबत्‍ता उनके सुरक्षाकर्मियों से मीडिया वालों की हल्‍की नोकझोंक हो गई। यहां तक कि एक दैनिक अखबार के कैमरामैन को झड़प के बाद हल्की चोट भी आ गयी।

राहुल गांधी ने अस्‍पताल में घायलों से बातचीत की और उनके जख्‍मों पर मरहम लगाते हुए आश्‍वस्‍थ किया कि उन्‍हें कोई भी दिक्‍कत पेश आने नहीं दी जायेगी। राहुल गांधी के साथ कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल, सांसद राजाराम पाल और विधायक अजय कपूर और संजीव दरियाबादी भी थे।

यह सब राजनीतिक रोटियों से ज्‍यादा कुछ नहीं था। क्‍योंकि अगर राहुल गांधी को हादसे के पीडि़तों की इतनी ही चिंता थी तो उन्‍होंने हादसे की खबर लगते ही अपनी युवा ब्रिगेड- युवा कांग्रेस के जवानों को राहत कार्य में मदद के लिए क्‍यों नहीं भेजा। क्‍या उनकी युवा ब्रिगेड सिर्फ उनके पीछे नारे लगाने के लिए है। ज्‍यादा दूर नहीं कम से कम युवा कांग्रेस की कानपुर इकाई तो तत्‍परता दिखाई ही सकती थी।

हम यहां सिर्फ कांग्रेस को नहीं बल्कि अन्‍य सभी जैसे भाजपा के राजनाथ सिंह और उमा भारती के लिए भी कहेंगे।

भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह और एक लम्बे समय बाद भाजपा में वापस लौटीं साध्वी उमा भारती ने भी यहां हैलेट अस्पताल में भर्ती दुर्घटना के घायलों को देखा और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। इन दो भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ भाजपा राज्य इकाई के अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही भी थे।

इन सभी पार्टियों के पास अपनी-अपनी युवा इकाईयां हैं। अगर देश की युवा राजनीतिक पार्टियों की सक्रियता रेल हादसो, बाढ़, भूकंप, आदि त्रास्दियों में दिखे तो ना केवल युवाओं का सम्‍मान बढ़ेगा बल्कि पार्टियों का कद कई गुना बढ़ जायेगा।

यह बात तो रही घायलों से मिलने और उनके दर्द पर मर‍हम लगाने की मगर क्‍या राजनेता किसी हमदर्दी के लिये घायलों से मिलने जा रहे है या फिर आगामी चुनाव को नजर में रखकर चुनावी दांव पेंच साधने जा रहे है। आपकी क्‍या प्रतिक्रिया है हमे अवगत करायें। निचे दिए कमेंट बाक्‍स में अपने कमेंट दे। कमेंट दर्ज कराने के लिये अपने फेसबुक, जीमेल या फिर ट्विटर अकाउंट से लॉगइन करे।

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