दिल्‍ली हाईकोर्ट ने एम्स को लीवर प्रत्यारोपण के लिए कहा

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दिल्ली। हाईकोर्ट ने गरीबी की रेखा से नीचे जीने वाली महिला का निशुल्क लीवर प्रत्यारोपण न करने पर एम्स को तलब किया है। न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय व दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि उक्त महिला का निशुल्क लीवर प्रत्यारोपण क्यों नहीं किया जा रहा। जब महिला गरीबी के कारण इलाज करवाने में असमर्थ है तो क्या उसे इलाज करवाने का अधिकार नहीं है।

याची मंजू देवी (42) के अधिवक्ता राकेश प्रभाकर ने अदालत को बताया कि महिला क्रोनिक लीवर की बीमारी से पीडि़त है। बिहार निवासी मंजू पहली बार 31 मई-2010 को अस्पताल में भर्ती हुई थी। उसे अस्पताल प्रशासन ने पूरा खर्च वहन करने को कहा था। बीमारी बढऩे के बाद मंजू फिर एम्स में भर्ती हुई और डाक्टरों ने उसकी पूरी चिकित्सा जांच की लेकिन गरीबी के बावजूद उसने स्वयं अस्पताल का पूरा खर्च वहन किया।

इसी वर्ष फरवरी में स्वास्थ्य खराब होने पर उसे फिर अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा और आखिर अप्रैल में डाक्टरों ने चिकित्सा जांच के बाद उसे लीवर प्रत्यारोपण करवाने की सलाह दी। मंजू का लीवर पूरी तरह से खराब हो चुका है और यदि उसे न बदला गया तो उसकी जान को खतरा है लेकिन डाक्टरों ने उसे इलाज से पूर्व चिकित्सा खर्च जमा करवाने का निर्देश दिया है। हर व्यक्ति को इलाज करवाने का अधिकार है। अत: एम्स को मंजू का निशुल्क लीवर प्रत्यारोपण का निर्देश दिया जाए।

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