दुनिया का हर चौथा भूखा व्यक्ति भारत में

संस्था के क्षेत्रीय प्रबंधक का कहना है कि भूखे लोग या यूं कहें कि जिन लोगों को दो वक्त का भोजन कभी-कभी ही नसीब होता है उनकी संख्या इस वजह से बढ़ी क्योंकि आर्थिक विकास में ग्रामीण गरीबों को नहीं शामिल किया गया।
सामजिक सुरक्षा की योजनाएं जो सरकार द्वारा चलायी गयीं उनका लाभ ऐसे ग्रामीणों तक नहीं पहुंचा। सर्वे रिपोर्ट उजागर करते हुए उन्होंने कहा कि हम लोग ऐसी दुनिया में जीवन व्यतीत कर रहे हैं जहां भूखें लोगों की संख्या पहली बार एक अरब से ज्यादा हो गयी है। संस्था के प्रतिनिधियों का कहना था कि दुनिया के एक अरब भूखे लोगों में से हर चौथा व्यक्ति भारत का नागरिक है।
;उन्होंने कहा कि यह हकीकत किसी को भी विचलित कर देने के लिए काफी है बावजूद इसके सरकारें इस ओर उचित प्रकार से ध्यान नहीं दे रही हैं। देश में पांच साल से कम के करीब 40 प्रतिशत बच्चों का वजन सामान्य से कम है और 48 प्रतिशत बच्चे ऐसे पैदा हो रहे हैं जिनका समुचित विकास मां के गर्भ में भी नहीं हो पा रहा है।












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