हरियाणा में 53 फीसदी महिलाएं करती हैं तम्बाकू का सेवन

प्रदेश के इकलौते पीजीआई के क्षय एवं छाती रोग विभागाध्यक्ष डॉ. केबी गुप्ता एक इंटरनैशनल संस्था के सर्वे में उभरी इस चौंकाने वाली हकीकत को बेहद खतरनाक बताते हुए कहते हैं कि तम्बाकू का सेवन लोगों को मौत की ओर ढकेल रहा है और अज्ञानतावश वे धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों का शिकार होते जा रहे हैं।
वहीं हरियाणा की एकमात्र हैल्थ यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. एसएस सांगवान कहते हैं कि वर्तमान माहौल में यहां-वहां सड़क पर अक्सर युवा धूएं के छल्ले उड़ाते हुए नजर आते हैं। शायद, आधुनिकता का प्रतीक मान कर और एक दूसरे की होड़ में हमारी युवा पीढ़ी बीड़ी-सिगरेट, तंबाकू, हुक्का, गुटका व पान खाने से गुरेज नहीं कर रही। लेकिन, लोगों को यह बात समझ लेनी होगी कि वे ऐसा करते हुए खुद-ब-खुद मौत को दावत दे रहे हैं लिहाजा अनेक बीमारियों के जनक तम्बाकू के सेवन से लोगों को परहेज कर लेना चाहिए।
दुनिया भर में बढ़ रहा है तंबाकू का चलन
डॉ. केबी गुप्ता के मुताबिक विश्वभर में तंबाकू सेवन करने वालों की संख्या में दिन प्रतिदिन भारी ईजाफा हो रहा है। विश्वभर में इस आदत से ग्रस्त लोगों की संख्या जितनी बढ़ती जा रही है उतने ही अधिक लोग मौत का शिकार बन रहे हैं। उससे अधिक लोग नकारा जीवन व्यतीत करने के लिए मजबूर हो जाते हैं और तरह-तरह की गंभीर बिमारियों के शिकार हो रहे हैं। वे कहते हैं कि हरियाणा में तंबाकू सेवन करने वाले पुरुष व महिलाओं की संख्या में बढ़ोत्तरी होना बेहद चिंता की बात है क्योंकि यहां पर 87 प्रतिशत पुरुष व 53 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू का सेवन करते हैं।
डॉ. गुप्ता कहते हैं कि धूम्रपान व तंबाकू सेवन बीमारियों की जड़ है। बीड़ी, सिगरेट के धुंए के कारण पीने वाला खुद को कैंसर जैसी दर्जनों बिमारियों को दावत देता ही है इसके साथ ही अपने आसपास बैठे लोगों को भी मौत के मुंह में भेज रहा है। विश्वभर में मृत्यु एवं अनेक रोगों का मुख्य कारण तंबाकू सेवन माना गया है। उदाहरण के तौर पर एलर्जी, दमा, सांस की बीमारी, टीबी, मृत शिशु पैदा होना, खाज, खुजली, निकोटिन से होने वाली बीमारियां कैंसर, हार्ट अटैक, एजांइना सीने में दर्द, गला सांस की नली, ब्लड़ प्रेशर, स्ट्रोक मास्तिष्क आघात, पेट की बीमारियां ऐसीडीटी आदि बीमारियां इसी की देन हैं।
किशोर अवस्था में होती है शुरूआत
डॉ. केबी गुप्ता बताते हैं कि धूम्रपान की शुरूआत किशोरावस्था से होती है, बच्चे अक्सर बड़ों की देखादेखी या अपने आप को बड़ा साबित करने के लिए धूम्रपान एवं नशा करते हैं। वे बताते हैं कि महिलाओं में गर्भावस्था में धूम्रपान करने से बच्चा कम वजन का पैदा होता है, बच्चों में सक्रमंण रोग, श्वास रोग, मानसिक विकार तथा मृत्यु की अधिक संभावना रहती है। उन्होंने बताया कि विश्वभर में धूमपान एवं तंबाकू सेवन से प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख लोगों की मौत होती है और प्रत्येक आठ सैकेंड में एक मौत तंबाकू के सेवन के कुप्रभावों के कारण होती है।
भारत में प्रतिदिन करीब 2200 लोगों की मृत्यु तंबाकू संबधित कारणों से होती है तथा 15 वर्ष से अधिक उम्र के 40 से 60 प्रतिशत वर्ष पुरूष, 2 से 15 प्रतिशत शहरी स्त्रियां और 20 से 50 प्रतिशत ग्रामीण स्त्रियां सेवन करती हैं। कैंसर से होने वाली 30 प्रतिशत मौत सिगरेट के सेवन से होती है, व्यस्क पुरूषों व महिलाओं में धूम्रपान सेवन से प्रजनन क्षमता एवं गुणवात्ता पर भी असर पड़ सकता है।
आज धूम्रपान के कारण करीब 70 लाख लोग क्रोनिक पल्मोनरी आक्सट्रक्टिव बीमारी से ग्रसित हैं जो धू्रमपान के सेवन से होती है। धूम्रपान में करीब 4 हजार विभिन्न प्रकार के रसायन मौजूद होते हंै जिनमें से 60 रसायन कैंसर पैदा करने की क्षमता रखते हैं। धूम्रपान से निकलने वाले धुएं में पाए जाने वाला बैजोपाइरीन नामक तत्व काफी खतरनाक होता है और कैंसर पैदा करने वाले पायरोलिटिक पदार्थ होते हैं।
जिन्दगी चाहिए तो करो तम्बाकू से तौबा
डॉ. एसएस सांगवान कहते हैं कि जिन्दगी के लिए तम्बाकू से तौबा कर लेनी चाहिए। वे बताते हैं कि उन्होंने पीजीआई कैंपस में पहले ही बीड़ी, सिगरेट पीना निषेध कर रखा है। डॉ. एसएस सांगवान ने आमजन से भी अपील करते हुए कहा कि तंबाकू व धू्रमपान का सेवन न करें। यह न केवल धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों के लिए हानिकारक है बल्कि उसके आसपास रहने वाले व्यक्ति को भी पैसिव स्मोकिंग का शिकार बना डालता है।
डॉ. सांगवान ने बताया कि रोहतक स्थित हरियाणा के एकमात्र पीजीआई संस्थान के जी ब्लाक में प्रत्येक सोमवार एवं वीरवार को एंटी स्मोकिंग क्लीनिक भी क्षय एवं छाती रोग विभाग द्वारा चलाया जाता है जहां बीड़ी सिगरेट छोडऩे के लिए लोगों को प्रेरित किया जाता है।
लेखक परिचय: देवेंद्र दांगी हरियाणा के स्वतंत्र पत्रकार हैं।
;











Click it and Unblock the Notifications