चुनाव के पहले तिजोरियां भर रही हैं मायावती : शिवपाल

श्री यादव ने कहा कि मु य सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी में यह पाया गया कि अगस्त 2009 में 11 चीनी मिलों को मूल्य 639.54 रुपये तय हुआ था। जबकि बाद में वर्र्ष 2010 में इसे घटाकर 614.70 करोड़ रुपये कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि 11 चीनी मिलों की कीमत तो एक ही मिल की बिक्री में आ गयी। 10 चीनी मिलों का पैसा किसकी जेब में गया। श्री यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने मनमाने ढंग से सभी चीनी मिलों का मूल्य कम आंका है।
इसके अलावा मिलों की परिस पत्तियों को औने-पौने दामों पर बेच दिया गया। श्री यादव का कहना था कि आखिर सरकार ने चीनी मिलों को चलाने का प्रयास क्यों नहीं किया। मिलों की वास्तविक स्थिति की जांच क्यों नहीं करायी गयी। उन्होंने आरोप लगाया कि बसपा के राज में किसानों का हर स्तर पर उत्पीडऩ किया गया। गन्ना किसानों का करोड़ों रुपये बकाया होने के बावजूद सरकार उसके भुगतान की बात नहीं सोच रही है।
किसानों का रुपया चीनी मिल मालिक दबाये बैठे है लेकिन इस मामले में सरकार कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि मायावती की कथनी-करनी का फर्क अब जनता के बीच उजागर हो चुका है। प्रदेश में कानून का नहीं जंगलराज चल रहा है। आम आदमी अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है।












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