भट्ठा परसौल: किसानों की जंग में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी कूदे

भट्टा-पारसौल की घटना को लेकर पहले राहुल गांधी, उसके बाद राष्ट्रीय महिला आयोग और अब मनमोहन सिंह की सक्रियता को उत्तर प्रदेश के लिहाज से राजनीतिक हल्कों में काफी अहम माना जा रहा है। वजह है कि जिस यमुना एक्सप्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहण और मुआवजे के सवाल पर आंदोलित भट्टा-पारसौल में दो किसानों के मारे जाने को प्रधानमंत्री ने गंभीरता से लिया है। इसी एक्सप्रेस-वे से जुड़े मामलों के विरोध में टप्पल और मथुरा में पहले भी किसानों को पुलिस की गोली का शिकार होना पड़ा था।
तब हुए आंदोलनों और उनमें मारे गए किसानों को लेकर केंद्र सरकार ने इतनी तवज्जो नहीं दी थी। इस बार इतनी सक्रीयता की वजह शायद उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी बयान में सिर्फ भट्टा-पारसौल और आछेपुर में किसान आंदोलन के दौरान गंभीर रूप से एक घायल हर व्यक्ति को 50 हजार रुपये और मामूली रूप से घायलों को दस-दस हजार रुपये की आर्थिक मदद देने की बात कही गई है।
कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के भट्टा-पारसौल जाकर किसानों की लड़ाई में शामिल होने, धरना देने और बाद में गिरफ्तारी के बाद यह मामला बड़े स्तर सुर्खियों में आ गया। जबकि पीडि़त किसानों को लेकर प्रधानमंत्री से मिलने के बाद राहुल गांधी के बयानों के बाद से मामला और तूल पकड़ चुका है। राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम वहां मौका-मुआयना करके सीबीआइ जांच की मांग कर चुकी है। उससे नाराज मुख्यमंत्री मायावती इस आयोग को ही भंग करने की मांग कर चुकी हैं।
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