'पहली गोली सीने पर और दूसरी सिर में'

ओसामा बिन लादेन पर कार्रवाई के लिए अमरीका के दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों ने अफ़ग़ानिस्तान में बगराम सैन्य अड्डे से उड़ान भरी और पाकिस्तान में प्रवेश करने से पहले जलालाबाद में रुके. पाकिस्तान में प्रवेश करने के बाद ही इस कार्रवाई को सबसे बड़े संभावित ख़तरे का सामना करना पड़ा. ख़तरा ये था कि पाकिस्तान ये हेलकॉप्टर देखकर जवाबी कार्रवाई कर सकता था.
लेकिन ऐबटाबाद में पाकिस्तानी सेना की अकादमी है जिसकी वजह से अमरीका को फ़ायदा हुआ क्योंकि रात को वहाँ हेलीकॉप्टरों की आवाज़ सुनकर लोगों को हैरानी नहीं हुई होगी. ऐबटाबाद की आलीशान इमारत तक पहुंचते ही अमरीकी अभियान को दूसरी समस्या का सामना करना पड़ा. शुरुआती योजना ये थी कि एक टीम रस्सियों के सहारे छत पर उतरेगी और दूसरी टीम सीधे इमारत के आँगन में. लेकिन एक हेलीकॉप्टर के ब्लेड में दिक्कत के बाद ये योजना रद्द करनी पड़ी.
नेवी सील्स को चंद सैकेंड के अंदर ही तय करना पड़ा कि अब क्या करना है. अंतत दोनों हेलीकॉप्टर आँगन में उतरे. आगे कई दीवारें थीं. जैसे ही हेलीकॉप्टर इमारत के आँगन में उतरे, गोलीबारी शुरु हो गई- जैसा कि 25 अमरीकी कमांडो ने सोचा था. अमरीका के मुताबिक़ इमारत में करीब 12 बच्चे और महिलाएँ भी थीं. उस समय कमांडो को वो फ़ैसले लेने थे जिस पर ज़िंदगी और मौत निर्भर करती थी- उनकी अपनी जान और उन लोगों की भी जो इमारत में पहले से मौजूद थे.
नेवी सील्स को असल में चंद क्षणों में ये तय करना था कि इमारत में उपस्थित कौन से लोग उनके लिए घातक हैं और कौन लोग ऐसे हैं जो वहाँ मौजूद तो हैं पर घातक नहीं है. ज़ाहिर है ये आसान नहीं था. नेवी सील्स ये पहले से ही मानकर चल रहे थे कि इमारत में मिलने वाले कुछ लोगों ने शायद विस्फोटक आत्मघाती जैकेट पहनी हो.
इस बीच व्हाइट हाउस और सीआईए के एक केंद्र में राष्ट्रपति ओबामा समेत कई अधिकारी अभियान पर नज़र रखे हुए थे. लेकिन लिओन पनेटा का कहना था कि जब कमांडो इमारत के अंदर प्रवेश कर गए थे, तो 20-25 मिनट तक अमरीका में अधिकारियों को कुछ नहीं पता चल पा रहा था कि आख़िर क्या हो रहा है.
उधर इमारत में नेवी सील्स पहली मंज़िल पर गए और उस संदेशवाहक (कोरियर) को मार दिया जिस पर पहले से नज़र रखी जा रही थी. उसका भाई भी मारा गया. संदेशवाहक की पत्नी भी गोलीबारी में मारी गई. व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जे कार्ने ने बताया है कि सील्स इमारत के ऊपर वाले माले पर गए और तीसरी मंज़िल के कमरे में घुस गए.
वहाँ ओसामा बिन लादेन की पत्नी सील्स की ओर दौड़ी और अपने पति का नाम लेकर चिल्ला रही थी. सील्स ने पत्नी की जांघ में गोली मारी. अधिकारियों ने बताया कि एक कमांडो ने एक महिला को जल्दी से वहाँ से दूर घसीटा क्योंकि उसे डर था कि कहीं उसने आत्मघाती जैकेट न पहनी हो. इससे पूरी टीम को नुक़सान हो सकता था. ये स्पष्ट नहीं है कि क्या वो ओसामा की पत्नी थी या नहीं.
इसी कमरे में ओसामा बिन लादेन और उनका एक बेटा भी मौजूद था. ओसामा को पहली गोली सीने में लगी, दूसरी गोली बाईं आँख के ऊपर लगी जिससे उनकी खोपड़ी का एक हिस्सा उड़ गया. ये पता नहीं चला है कि ये गोलियाँ एक ही कमांडो ने चलाईं या दो ने या कई ओर से गोलीबारी हुई.
करीब आधे घंटे तक अमरीका में बैठे अधिकारियों को अभियान की जानकारी नहीं मिल रही थी. ज़ाहिर है वहाँ काफ़ी घबराहट थी. आख़िरकर अमरीका में अधिकारियों को बताया गया कि 'जेरोनिमो" मारा गया है. लेकिन नेवी सील्स का काम पूरा नहीं हुआ था. उन्होंने जल्दी-जल्दी इमारत का जायज़ा लिया और वहाँ अल क़ायदा से जुड़ी तमाम जानकारियाँ और रिकॉर्ड इकट्ठा किए. जो हेलीकॉप्टर काम नहीं कर रहा था, उसे उड़ा दिया गया.
हालांकि इससे ये चिंता फिर बढ़ गई कि पाकिस्तान को समय से पहले ही अमरीकी अभियान के बारे में पता चल जाएगा. इमारत में ऐसे लोग भी थे जिनसे कोई मुठभेड़ नहीं हुई. इन लोगों के हाथ बाँध दिए गए थे. उन्हें इमारत में ही छोड़ दिया गया. अभियान के बाद कमांडो जल्दी जल्दी ब्लैक हॉक पर चढ़े और नार्थ अरेबियन सी ( उत्तरी अरब सागर) की ओर चले गए. साथ में ओसामा बिन लादेन का शव भी था.
इसके बाद ही पाकिस्तान को बताया गया कि आख़िर क्या हुआ है. एपी को एक अधिकारी ने बताया कि एडमिरल माइक मलेन ने पाकिस्तानी सेना अध्यक्ष अशफ़ाक़ कियानी को बताया कि एक ऐसा अभियान पूरा हो गया है जिसके बारे में पहले से जानकारी नहीं दी गई थी. सैन्य अभियान के कुछ घंटों बाद और दुनिया को बताए जाने के कुछ समय पहले, ओसामा बिन लादेन को समुद्र में बहाया जा चुका था.
( ये पूरी जानकारी समाचार एजेंसी एपी ने दी है.)












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