अमेरिका के लिए भारत-चीन सबसे बड़ी चुनौती :बराक ओबामा

ओबामा अपनी यात्रा के पहले पड़ाव नेवादा के रेनो में गुरुवार को कहा, "यदि हम अपने घाटे में कमी करना चाहते हैं तो हम शिक्षा जैसे क्षेत्रों में कटौती कर ऐसा नहीं कर सकते।" उन्होंने कहा, "इसलिए मेरा मानना है कि हमें अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए कुछ बेहतर रास्ते चुनने होंगे।"
उन्होंने कहा, "हमारे बच्चे पहले से कहीं ज्यादा प्रतिस्पर्धा का सामना करने जा रहे हैं क्योंकि आने वाले समय में लाखों चीनी, भारतीय, ब्राजीली और पूर्वी यूरोप के बच्चे नौकरियों के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे। ऐसे में हम अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए निवेश क्यों नहीं करें? उन्होंने कहा कि अमेरिका की दोनों राजनीतिक पार्टियों को मिलकर शिक्षा जैसे जरूरी क्षेत्रों को नुकसान पहुचाए बिना राजकोषीय घाटे को संतुलित तरीके से कम करने के प्रयास करने की जरूरत है।
डेमोक्रेटिक पार्टी के कैलीफोर्निया के सान फ्रांसिस्को में एक आयोजन में ओबामा ने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हम पूरी दुनिया में बदलाव देख रहे हैं जैसे चीन और भारत तेजी से उभर रहे हैं और मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ रही है, प्रौद्योगिकी के कारण दुनिया छोटी होती जा रही है।"
सान फ्रांसिस्को में ही एक अन्य कार्यक्रम के दौरान ओबामा ने एक वृहद अमेरिका, कृपालु अमेरिका, सेवाभावी अमेरिका, महत्वाकांक्षी अमेरिका का अपना नजरिया प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि यह ऐसी चीजें है जो हमारी परेशानियों को खत्म करेंगी। हमारा घाटा बेहद ज्यादा है, हमारा कर्ज ज्यादा है, हम मंदी से गुजर रहे हैं और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा है।












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