हजारे आंदोलन: तहरीर चौक बनता जा रहा है दिल्‍ली का जंतर-मंतर

नई दिल्‍ली। केंद्र व राज्‍य सरकारों के भ्रष्‍ट तंत्र से जनता कितनी खफा है, यह बात अन्‍ना हजारे के आमरणन अनशन से साफ होती जा रही है। देश भर में लाखों लोग अन्‍ना हजारे के समर्थन में उतर आये हैं। सच पूछिए तो दिल्‍ली का ऐतिहासिक स्‍थल जंतर-मंतर धीरे-धीरे मिस्र का तहरीर चौक बनता जा रहा है। हजारे आंदोलन को जितना समर्थन इंटरनेट पर मिल रहा है, उससे कहीं ज्‍यादा समर्थन देश के विभिन्‍न शहरों में मिल रहा है।

शुक्रवार की सुबह जंतर-मंतर पर 10 हजार से ज्‍यादा लोग एकत्र थे। इसका मतलब यह मत समझियेगा कि हजारे के समर्थन में सिर्फ दस हजार लोग आये हैं। ये तो सिर्फ तात्‍कालिक दृश्‍य था। गुरुवार को सुबह से लेकर शाम तक दिल्‍ली व एनसीआर के लोगों के पास जब-जब समय मिल रहा था, वे जंतर-मंतर पहुंच रहे थे। ऐसा ही नजारा शुक्रवार की सुबह भी देखने को मिला। लोग ऑफिस से छुट्टी लेकर, हाफ डे लेकर या देर से आने की एप्‍लीकेशन लगाकर हजारे का समर्थन करने जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं।

लोगों का आना-जाना लगातार बना हुआ है। जरा सोचिए अगर यही लोग यहां आकर बैठ जायें तो क्‍या होगा। आपने बिलकुल सही सोचा, जंतर-मंतर का हाल भी मिस्र के तहरीर चौक जैसा ही होगा।

गुरुवार की शाम उत्‍तर प्रदेश की राजधानी में लखनऊ विश्‍वविद्यालय के करीब डेढ़ हजार छात्र-छात्राओं ने कैंडल जुलूस निकाला। यहां के धरना स्‍थल पर हजारे के समर्थन में कई लोग धरने पर बैठ गये हैं। इसी प्रकार बेंगलुरू, चेन्‍नई, मुंबई, अहमदाबाद, चंडीगढ़, हैदराबाद, आदि सभी बड़े शहरों में लोग हजारे के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं। ये प्रदर्शन व धरने शुक्रवार को भी जारी रहेंगे।

इस आंदोलन की खास बात यह है कि इसमें कोई राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता नहीं, बल्कि आम आदमी शामिल हो रहा है। वो लोग शामिल हो रहे हैं, जिनका राजनीति से कोई सरोकार नहीं। वो शामिल हो रहे हैं, जो कभी किसी राजनीतिक सभा में नहीं गये। वे लोग शामिल हो रहे हैं, जिन्‍होंने कभी कोई प्रदर्शन में हिस्‍सा नहीं लिया। इस पर अगर आप पूछेंगे क्‍यों, तो उत्‍तर सिर्फ एक है। वो है भ्रष्‍टाचार से ये लोग तंग आ चुके हैं। लोग तंग आ चुके हैं, रोज-रोज के घोटालों की खबरों से परेशान हो चुके हैं।

ये लोग इसलिए हजारे का समर्थन कर रहे हैं, क्‍योंकि उनका खुद का पैसा राजनेता व उच्‍च अधिकारी खा रहे हैं और वो कुछ नहीं कर पा रहे हैं। अब लोगों को यह समझ आ गया है, कि इस आंदोलन में साथ देकर अपने पैसे की बर्बादी को रोका जा सकता है। उन्‍हें समझ में आ गया है कि देश को बचाना है, तो इस आंदोलन में एक जुट होना होगा। एक बार फिर सोचिए मिस्र के तहरीर चौक के बारे में और देखिये जंतर-मंतर की ओर। आपको खुद समझ में आ जाएगा कि वाकई में अगर सरकार लोक पाल विधेयक नहीं लायी, तो यह स्‍थल तहरीर चौक और भारत के मिस्र बनने में जरा भी समय नहीं लगेगा।

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