देश के नाम खराब कर रहे भिखारियों पर लगे प्रतिबन्ध
आम तौर देखा जाता है कि खाने पीने की दुकानों, धार्मिक स्थानों व पर्यटक स्थलों पर ऐसे लोगों की भीड़ जमा होती है जो न तो वहां घूमने आते हैं और न ही ईश्वर का याद करने बावजूद इसके सवेरे से शाम तक फटे पुराने गंदे से कपड़े पहने भीख मांगते नजर आते हैं। विदेशी लोगों के सामने ये भिखारी भारत की जो तस्वीर पेश करते हैं उससे यह तो माना ही जा सकता है कि भारत एक गरीब देश है।
यही कारण है कि वाराणसी के गंगा सेवा निधि के संस्थापक सत्येन्द्र मिश्रा ने धार्मिक नगरी वाराणसी में पर्यटको के बीच घुसकर भीख मांगने पर पूर्ण प्रतिबध लगाने की की मांग की है। श्री मिश्र ने मांग की और कहा कि इस प्रकार देशी विदेशी पर्यटकों के बीच में जाकर भीख मांगने देश को शर्मसार करता है। गौरतलब है कि पर्यटकों के साथ कई आपराधिक घटनाओं में भी भिखारियों की भूमिका सामने आ चुकी है।
पर्यटक स्थलों पर भिखारियों की रोकथाम के लिए सरकार को प्रयत्न करने चाहिए। श्री मिश्र का कहना है कि वाराणसी के ऐतिहासिक गंगा घाटों समेत सारनाथ स्थित बौद्ध स्थलों को देखने प्रतिदिन हजारों की संख्या में देशी विदेशी पर्यटक यहां आते हैं। उन्होंने कहा कि भिखारी देश की छवि को धूमिल कर रहे हैं। उनका कहना है पैसा मांगना रोजगार बना चुके भिखारी जब पैसा पा जाते तब तो कई बात नहीं लेकिन कई बार वे पर्यटकों से बदसलूकी पर भी उतर आते हैं ऐसे में पुलिस के सिपाही उन पर कोई कार्यवाही भी नहीं करते।













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