भ्रष्टाचार के खिलाफ अनशन पर बैठे अन्ना हजारे

अन्ना के अनशन को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय ने चिंता जताई है। अन्ना हजारे ने ऐलान किया है कि जब तक लोकपाल बिल पास नहीं हो जाता वे दिल्ली में आमरण अनशन पर बैठे रहेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय से सोमवार शाम जारी एक बयान के अनुसार मंत्रियों की एक उपसमिति रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी के नेतृत्व में हजारे से मिला लेकिन वे उन्हें मनाने में असफल रहे।
इससे पहले सोमवार को हजारे कह चुके हैं, "प्रधानमंत्री ने लोकपाल विधेयक का स्वरूप तय करने के लिए नागरिक समाज के लोगों के साथ एक संयुक्त समिति गठित किए जाने की मांग को अस्वीकार कर दिया है, इसलिए पहले ही की गई घोषणा के अनुसार मैं आमरण अनशन पर बैठूंगा। यदि इसके लिए मेरी जान भी कुर्बान हो जाए तो मुझे इसका अफसोस नहीं होगा। मेरा जीवन राष्ट्र को समर्पित है।"
हजारे जंतर-मंतर पर अनशन शुरू करेंगे। कार्यकर्ताओं ने देश के अन्य लोगों से इस मांग के पक्ष में अनशन करने की अपील की है। सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल ने कहा, "मैं देश की जनता से अपील करता हूं कि वे इस भूख हड़ताल में शामिल हों और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को अपना समर्थन दें।" इस मुहिम से जुड़े कार्यकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश संतोष हेगड़े और वकील प्रशांत भूषण के साथ मिलकर जन लोकपाल विधयेक का प्रारूप तैयार किया है, जो सरकारी नियंत्रण से स्वतंत्र लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति की मांग करता है।
इसके मुताबिक भ्रष्टाचार के किसी भी मामले की जांच एक साल के भीतर पूरी हो जानी चाहिए और सजा कम से कम पांच साल तथा अधिकतम उम्रकैद होनी चाहिए, जबकि सरकारी प्रारूप में सजा कम से कम छह माह और अधिकतम सात वर्ष का प्रावधान है। कार्यकर्ताओं ने सरकारी फॉर्मूले को खारिज कर दिया है।












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