घोटालों के राजा के खिलाफ 80 हजार पन्नों की चार्जशीट
राजा के खिलाफ यह आरोप पत्र सीबीआई सात बक्सों में रख कर कोर्ट लेकर आयी। इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश ओपी सैनी कर रहे हैं। न्यायाधीश सैनी ने कहा कि उन्हें इस बात की संतुष्टि है कि इस मामले में आगे बढ़ने के लिए अब समुचित सामग्री है। उन्होंने उन पांच लोगों को भी अदालत में उपस्थित होने का आदेश जारी किया, जो अब तक न्यायिक हिरासत में नहीं हैं। उन्हें 13 अप्रैल तक अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया गया है।
आरोपियों में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा, उनके निजी सहयोगी आरके चंदोलिया, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और स्वान टेलीकॉम के प्रवर्तक शाहिद बलवा शामिल हैं। वे सभी न्यायिक हिरासत में हैं। उन्हें व्यक्तिगत तौर पर अदालत में पेश किया गया। इससे पहले तीन-चार मौकों पर वे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए थे।
आरोपियों में स्वान के निदेशक विनोद गोएनका, यूनीटेक वायरलेस के निदेशक संजय चंद्रा और रिलायंस अनिल धीरूभाई अम्बानी समूह के तीन अधिकारी गौतम दोषी, हरी नायर और सुरेंद्र पिपारा का भी नाम है। इसके अलावा तीन कम्पनियों यूनीटेक, रिलायंस और स्वान टेलीकॉम पर भी आरोप लगाए गए हैं। अदालत में पेश किए गए दस्तावेज में चंदोलिया पर मामला चलाने की मंजूरी भी शामिल है, जैसा कि सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा द्वारा की गई जांच के आधार पर आर्थिक मामलों के सचिव चंदोलिया द्वारा सूचित किया गया है।
जांच एजेंसी के एक अधिकारी ने कहा कि अनिल अम्बानी समूह के तीन अधिकारियों को इसलिए आरोपी बनाया गया है, क्योंकि उन्होंने स्पेक्ट्रम हासिल करने में स्वान की अयोग्यता के मुद्दे को छुपा कर रखा। औपचारिक आरोप पत्र में यूनीटेक को भी स्पेक्ट्रम हासिल करने के लिए अयोग्य बताया गया है। आरोप में कहा गया कि पहले स्पेक्ट्रम आवंटन में अपनाई गई 'पहले आओ, पहले पाओ की नीति' और कुछ पक्षों को लाभ पहुंचाने के लिए समय सीमा को आगे बढ़ाने की नीति दोनों ही गलत इरादे से अपनाई गई थी।
जांच एजेंसी ने हालांकि कहा कि वह लोगों से कहना चाहती है कि उनके द्वारा लगाए गए आरोप जुटाए गए सबूतों पर आधारित है और भारतीय कानूनों के मुताबिक जब तक औपचारिक सुनवाई के बाद आरोप सिद्ध नहीं हो जाए, किसी को दोषी नहीं माना जा सकता है। आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भ्रष्टाचार निषेध अधिनियम, 1988 के विभिन्न प्रावधानों के मुताबिक ठगी, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का आरोप लगाया गया है।
सीबीआई के एक अधिकारी ने कहा कि एजेंसी ने 125 गवाहों द्वारा दी गई सूचनाओं के आधार पर आरोप पत्र में 654 दस्तावेज लगाए हैं। इनमें से सात-आठ के रिकार्डेड बयान हैं, जो इस मामले में एक महत्वपूर्ण सबूत हैं। अधिकारी ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में सरकार को 30,984 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। स्वान और यूनीटेक लाइसेंस हासिल करने के लिए पूरी तरह अयोग्य थीं।
वरिष्ठ लोक अभियोजक ए. के. सिंह ने कहा कि इस आरोप पत्र में कलैगनार टीवी, आसिफ बलवा और राजीव अग्रवाल को शामिल नहीं किया गया है। उन्हें पूरक आरोप पत्र में शामिल किया जा सकता है। पूरक आरोप पत्र अप्रैल अंत में दाखिल किया जाएगा। राजा के निकट सहयोगी सादिक बाचा, जिन्हें पिछले महीने चेन्नई में उनके घर पर रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाया गया था, के बारे में जांच एजेंसी ने कहा कि वह इस मामले में दिए गए रिश्वत का पता लगा रही है, जो सम्भव है कि उनसे होकर गुजरा हो।
राजा ने दूरसंचार मंत्री पद से 14 नवम्बर को इस्तीफा दिया था। उन्होंने आधिकारिक लेखा परीक्षक द्वारा स्पेक्ट्रम आवंटन में उनके द्वारा अपनाई गई नीति के कारण देश को अरबों डॉलर का नुकसान होने की बात कहे जाने के बाद पद से इस्तीफा दिया था। सीबीआई ने उन्हें, बेहुरा और चंदोलिया को दो फरवरी को गिरफ्तार किया था, जबकि बलवा को आठ फरवरी को गिरफ्तार किया गया था।













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