बीपीएल मु्द्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की लगाई क्लास

Supreme Court
नई दिल्ली। इन दिनों केन्द्र सरकार के दिन गर्दिश में चल रहे हैं, तभी तो एक समस्या का समाधान करते हैं तो दूसरे मामले में उनकी क्लास सुप्रीम कतोर्ट लगा देता है। ताजा मामला बीपीएल धारकों का है जिसे लेकर केन्द्र सरकार कटघरे में हैं। देश की सर्वोच्च न्यायालय ने हर राज्य में योजना आयोग की सिफारिशों के अनुसार उसकी आबादी के 36 फीसदी परिवारों को ही बीपीएल श्रेणी में रखने की सीमा बांधने पर मंगलवार को केंद्र सरकार की खिंचाई की।

कोर्ट ने सरकार ने पूछा हमें समझ में नहीं आ रहा है कि इस तय सीमा के पीछे कारण क्या है, आखिर सरकार चाहती क्या है। अदालत ने कहा कि इस सीमा को कैसे न्यायोचित कहा जा सकता है। पीठ ने वाधवा समिति की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए सार्वजनिक वितरण प्रणाली में ब़डे पैमाने पर चोरी को लेकर चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि पूरी प्रणाली के कंप्यूटरीकरण की तत्काल जरूरत है। अदालत ने यह भी कहा कि कम्प्यूटरीकरण की वर्तमान गति से तो लगता है कि यह यह काम दस साल में भी पूरा नहीं किया जा सकेगा।

अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार के हलफनामे का भी जिक्र किया। इसमें कहा गया है कि केंद्र के अनुसार राज्य में बीपीएल कार्डधारक 106.7 लाख हैं। हालांकि राज्य में इससे कहीं अधिक लोग बीपीएल श्रेणी में आएंगे और उन्हें कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।

पीठ पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में देश के पीडीएस प्रणाली में बड़े पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार की शिकायत की गई है। साथ ही , खराब भंडारण के कारण अनाज की बर्बादी के मुद्दे को भी उठाया गया है।

पीठ ने बीपीएल परिवार की पहचान के लिए 2004 के मानदंड अपनाये जाने को लेकर भी सरकार की खिंचाई की है। 2004 के मानदंड के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में दैनिक 12 रुपये से कम और शहरी क्षेत्रों में 17 रुपये से कम की आय वाले लोग गरीबी रेखा के नीचे आते हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+