मजबूरी और सरकारी दवाब में जाटों से मिलेगें चिदंबरम
लेकिन तब तक जाटों का हरियाणा और उत्तर प्रदेश सड़क यातायात पर लगाई गई रोक जारी रहेगी। अब सवाल ये उठता है कि हालात से मजबूर होकर चिदम्बरम ने जाटों से मिलने का समय तय किया है। क्योंकि यूपी में मायावती और हरियाणा में हुड्डा ने जाटों की मांगों का समर्थन किया है। ऐसे में चौतरफा वार सह रही यूपीए सरकार के पास चारा ही नहीं कि वो जाटों से ना मिले। अब देखना ये है कि ये मुलाकात क्या रंग लाती है?
आपको बता दें कि केंद्र सरकार की नौकरियों में अन्य पिछड़ी जातियों (ओबीसी) के तहत आरक्षण देने की मांग को लेकर जाट समुदाय के सैकड़ों लोग दो राज्यों की रेल पटरियों पर गत सात मार्च से धरना दे रहे हैं। इससे रेलगाड़ियों का परिचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। आंदोलनकारियों ने हरियाणा के भिवानी, हिसार और जींद जिलों में सभी रेलमार्गो को अवरूद्ध कर दिया है। जिसते चलते 76 रेलगाड़ियों को रद्द करना पड़ा है। कुछ रेलगाड़ियों परिवर्तित मार्गो से चलाया जा रहा है।
आपको बता दें कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने केंद्र सरकार की नौकरियों में आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे जाट समुदाय की समस्याओं का समाधान करने की मांग करते हुए मंगलवार को राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाया था। भाजपा के रामदास अग्रवाल ने शून्यकाल में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सरकार ने यदि जाट समुदाय की चिंताओं का समाधान करने का प्रयास नहीं किया तो इससे उनका आंदोलन और तेज हो सकता है।उन्होंने कहा, आंदोलन के चलते रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सरकार ने यदि उनकी सुध नहीं ली तो आने वाले दिनों में उनका प्रदर्शन और तेज हो सकता है।













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