भारत यात्रा के लिए अब एनओसी अनिवार्य

भारत यात्रा के लिए अब एनओसी अनिवार्य

हफ़ीज़ चाचड़

बीबीसी हिंदी संवाददाता, इस्लामाबाद

रहमान मलिक ने एक बैठक में यह फ़ैसला लिया.

पाकिस्तानी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों, कलाकारों और पत्रकारों को भारत की यात्रा पर जाने से पहले गृह मंत्रालय से अनुमति पत्र हासिल करना अनिवार्य क़रार दिया है.

दिल्ली के हवाई अड्डे पर मशहूर गायक राहत फ़तेह अली ख़ान को भारतीय कस्टम के नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में हिरासत में लिए जाने की घटना के बाद सरकार ने यह फ़ैसला लिया है.

गृह मंत्रालय की ओर जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार गृहमंत्री रहमान मलिक की अध्यक्षता में एक उच्चास्तरीय बैठक हुई जिस में ये फ़ैसला लिया गया कि सरकारी कर्मचारियों, कलाकारों और पत्रकारों को विदेशी यात्रा पर जाने से पहले सरकार से एनओसी या अनुमति पत्र लेना अनिवार्य क़रार दिया गया.

बयान में आगे बताया गया कि पहले चरण में केवल भारत की यात्रा पर जाने वाले सरकारी कर्मचारियों, कलाकारों और पत्रकारों केलिए अनुमति पत्र लेना ज़रुरी है और ये फ़ैसला 15 मार्च से लागू होगा.

गृह मंत्रालय के मुताबिक भारत के लिए एनओसी लेने वाले यात्रियों को विदेश मंत्रालय, शिक्षा और सूचना मंत्रालय की सलाह से निर्देश जारी किए जाएँगे.

इस से पहले गृह मंत्री रहमान मलिक ने संसद में बताया था कि पाकिस्तानी कलाकार एक साल में सौ से डेढ़ सौ बार विदेशी यात्रा करते हैं और अब उन्हें बताना पड़ेगा कि वह एक ही देश में इतनी बार क्यों जा रहे हैं.

'फ़ैसले की निंदा'

मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं, कलाकारों और पत्रकारों ने सरकार के इस फ़ैसले पर कड़ी आलोचना की.

जाने-माने पत्रकार नुसरत जावेद ने कहा, “ये न समझ आने वाले फ़ैसला है और ये तानाशाही के दौर की याद दिला रहा है. पाकिस्तानी नागरिक की हैसियत से मुझे संविधान ने कहीं भी यात्रा करने का अधिकार दिया है.”

उन्होंने बताया कि सरकार मीडिया पर नियंत्रण करना चाहती है इसलिए पत्रकारों को विदेशी यात्रा करने से रोक रही है.

कराची से वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता असलम ख़्वाजा ने इस फ़ैसला का विरोध किया साथ ही यह भी बताया कि सरकार भारत जाने वाले यात्रियों को यह ज़रूर बताए कि वहाँ क्या क़ानून हैं क्योंकि भारत की जाने वाले अधिकतर यात्री स्थानीय नियमों के बारे में नहीं जानते.

फ़िल्म लेखक सयद महताब शाह ने बीबीसी को बताया कि जब सरकार एक नागरिक को पास्पोर्ट जारी करती है तो उस का यह अर्थ हुआ कि सरकार ने उन्हें विदेशी यात्रा की अनुमति दी है.

उन्होंने कहा कि विदेशी यात्रा पर जाने से पहले अनुमति पत्र लेने का फ़ैसला उन्हें समझ नहीं आ रहा है.

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने भी सरकार ने इस फ़ैसले की कड़े शब्दों में निंदा की और चिंता व्यक्त करते हुए इस फ़ैसले को मानवाधिकारों का उल्लंघन क़रार दिया.

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