रेल बजट : बजट में पूरे देश का ध्यान रखा गया : ममता (लीड-1)
उन्होंने अपने सबसे बड़े आलोचक वामपंथी पार्टियों को कड़ी फटकार लगाते हुए उन्हें अवसरवादी कहा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार दीवालिया हो चुकी है और पहले उन्हें राज्य की वित्तीय स्थिति को दुरुस्त करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
पश्चिम बंगाल में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने जा रहा है। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी इस चुनाव में सत्ताधारी वामपंथी पार्टी की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी है।
उन्होंने बजट के लोकप्रिय होने के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि यदि यह बजट लोकहित में है तो लोकप्रिय होगा ही।
वित्त वर्ष 2011-12 का रेल बजट पेश करने के बाद ममता ने एक समाचार चैनल से कहा कि संसद में जो भी लोग शोर मचा रहे थे, उनका कोई-न-कोई राजनीतिक हित था। वे बजट भाषण शुरू होने से पहले भी शोर मचा रहे थे। यह उनकी आदत है।
पश्चिम बंगाल को विशेष तरजीह दिए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से उन्होंने पश्चिम बंगाल को कोई विशेष तरजीह नहीं दी है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने दूसरे राज्यों के लिए भी औद्योगिक परियोजनाओं और नई रेलगाड़ियों की घोषणा की हैं, जैसे, महाराष्ट्र, जम्मू एवं कश्मीर, पूर्वोत्तर आदि।
उन्होंने कहा कि छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के बाद हालांकि भारतीय रेल पर वित्तीय दबाव बढ़ा है, फिर भी यह विकासशील है और व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक है।
उन्होंने कहा कि भारतीय रेल की वित्तीय स्थिति बहुत अच्छी है और दूसरे विभागों की वित्तीय स्थिति इससे कोई विशेष अच्छी नहीं है।
बनर्जी ने शुक्रवार को पेश किए गए वित्त वर्ष 2011-12 के रेल बजट में 57,630 करोड़ रुपये के निवेश, 68 नई रेलगाड़ियों को चलाने और विजन 2020 दस्तावेज के अनुरूप मजबूत रेल नेटवर्क बनाने की घोषणा की। बजट में यात्री किराया और माल भाड़ा में परिवर्तन नहीं किया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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