गोधरा कांड के दोषियों को सजा 1 मार्च को (लीड-2)

अभियोजन पक्ष ने शुक्रवार को इस मामले को जघन्यतम करार देते हुए सभी 31 दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की। जबकि बचाव पक्ष ने अपील की कि दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी जानी चाहिए।

अभियोजन और बचाव पक्ष ने यह अपील यहां उच्च सुरक्षा वाले साबरमती जेल में स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पी.आर.पटेल की अदालत में की।

न्यायाधीश पटेल ने 27 फरवरी, 2002 को गोधरा रेलवे स्टेशन के पास साबरमती एक्सप्रेस की बोगी संख्या एस-6 में आग लगाने और साजिश रचने के लिए मंगलवार को 31 लोगों को दोषी करार दिया था। इस घटना में 59 लोग जिंदा जल गए थे। इस घटना के बाद पूरे गुजरात राज्य में भयानक साम्प्रदायिक दंगे भड़क गए थे, जिसमें 1,000 से अधिक लोग मारे गए थे।

अदालत ने मामले के कथित मास्टरमाइंड मौलवी सईद उमरजी सहित 63 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था।

अभियोजन पक्ष के वकील जे.एम.पांचाल ने इस बात की पुष्टि की कि उन्होंने दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की है। लेकिन उन्होंने अदालत के समक्ष क्या तर्क दिए थे, इसका खुलासा करने से इंकार कर दिया। उन्होंन कहा कि यह मामला हत्या और आपराधिक साजिश से सम्बंधित था, लिहाजा इसमें मृत्युदंड दिया जाना चाहिए।

अधिवक्ता आई.एम. मुंशी ने संवाददाताओं से कहा कि बचाव पक्ष ने रियायत बरतने के लिए कहा है। बचाव पक्ष ने कहा कि यह घटना कारसेवकों के आचरण की प्रतिक्रिया थी, लिहाजा इसे जघन्यतम मामला नहीं माना जा सकता।

मुंशी ने कहा कि दोषियों के अतीत, उनकी पारिवारिक परिस्थिति और इस सच्चाई पर विचार करते हुए उन्हें मृत्युदंड नहीं दिया जाना चाहिए कि उन्होंने सुनवाई के दौरान नौ साल जेल में बिताए हैं।

आरोपियों को हत्या, हत्या का प्रयास करने, लूट, डकैती और आगजनी के लिए दोषी ठहराया गया है।

अदालत ने दोषियों को दी जाने वाली सजा की मात्रा पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सजा एक मार्च को सुनाई जाएगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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