जेपीसी के बिना नहीं चल पाएगा बजट सत्र

विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी जहां अपनी मांग पर अड़े रहे, वहीं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उम्मीद जताई है कि यह सत्र बिना व्यवधान चलेगा।
आडवाणी ने रविवार को कहा है कि यदि सरकार चाहती तो शीतकालीन सत्र के दौरान संसद में पैदा हुए गतिरोध से बच सकती थी। उनके मुताबिक सरकार ने सत्र के पहले ही दिन विपक्षी दलों को बोलने का मौका दे दिया होता तो पिछला सत्र बेकार नहीं जाता।
आडवाणी ने रविवार को अपने ब्लॉग पर किए गए ताजा पोस्ट में वर्ष 2010 को घोटालों का वर्ष करार दिया है। उन्होंने कहा है कि लोकसभा में शीतकालीन सत्र के पहले दिन से ही पूरे विपक्ष ने मुख्य रूप से तीन मुद्दों को ही उठाने का फैसला किया था, जिसमें राष्ट्रमंडल घोटाला, 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला और मुम्बई रक्षा भूमि घोटाला शामिल है।
इसके बाद भाजपा ने अपने अधिकारिक बयान में भी यह बात कही कि बिना जेपीसी सत्र चलने नहीं दिया जाएगा।
इस पर प्रधानमंत्री ने फिलहाल कोई घोषणा तो नहीं की है, लेकिन हां सत्र के सुचारु रूप से चलने की उम्मीद जरूर जताई है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि संसद का बजट सत्र फलदायी होगा। मीडिया से बातचीत में मनमोहन सिंह ने कहा कि उनकी सरकार बजट के साथ तैयार है और देश को महंगाई से राहत देने वाला बजट पेश करने की तैयारी है।
बजट सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में क्या हुआ इस पर अभी तक कोई सरकारी बयान नहीं आया है, हां जेपीसी के गठन की चर्चा जरूर हुई है और बताया जा रहा है कि सभी दलों के बीच जेपीसी पर सहमति बन गई है। सच पूछिए तो जेपीसी के अलावा सरकार के पास अब कोई चारा भी नहीं है।
ज्ञात हो कि संसद का पूरा शीतकालीन सत्र 2जी स्पेक्ट्रम आवंट में हुई अनियमितता की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठित करने की विपक्ष की मांग की भेट चढ़ गया था।












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