केरल के पूर्व मंत्री पिल्लै को जेल (लीड-1)
विशेष अदालत के न्यायाधीश बी. विजयकुमार ने पुलिस को पिल्लै व अन्य अभियुक्त ठेकेदार पी.के. संजीवन को जेल भेजने का निर्देश दिया।
सर्वोच्च न्यायालय ने करीब 30 साल पुराने इडामलायार बांध भ्रष्टाचार मामले में केरल उच्च न्यायालय के आदेश को पलटते हुए 10 फरवरी को पिल्लै और दो अन्य को इस मामले में दोषी बताया था।
अदालत में दाखिल होने से ठीक पहले पिल्लै ने संवाददाताओं से कहा, "यह एक राजनीति से प्रेरित मामला है और मैंने कोई भ्रष्टाचार नहीं किया।"
पिल्लै के साथ बड़ी संख्या में उनके समर्थक मौजूद थे। वह केरल कांग्रेस (बी) के अध्यक्ष हैं, जो कांग्रेस नेतृत्व वाले विपक्ष की सहयोगी है।
पिल्लै के साथ अभिनेता से विधायक बने उनके पुत्र के.बी. गणेश और राज्य में वरिष्ठ नौकरशाह उनके दामाद टी. बालाकृष्णन भी मौजूद थे।
पिल्लै ने अदालत से अनुरोध किया कि उनके साथ ए श्रेणी के कैदी और एक राजनीतिक कैदी जैसा बर्ताव हो। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी जान को खतरा है।
उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें सप्ताह में एक बार परिवार से मिलने की अनुमति दी जाए। इसके अलावा उन्होंने अदालत से यह भी कहा कि उन्हें चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए क्योंकि वह हृदय रोगी हैं।
यह मामला 1985 का है। उस समय खबरें आईं थीं कि इडामलायार सुरंग में दरारें बन गई हैं। वर्ष 1988 में हुई एक न्यायिक रिपोर्ट में परियोजना में खामियों की सम्भावना व्यक्त की गई थी और वाम मोर्चा सरकार ने अपराध शाखा से इसकी जांच कराने का आदेश दिया था।
साल 1999 में एक विशेष अदालत ने पिल्लै व अन्य को दोषी मानते हुए उन्हें पांच साल कैद की सजा सुनाई। इस पर पिल्लै व अन्य ने केरल उच्च न्यायालय में अपील की, जहां उन्हें बरी कर दिया गया।
इसके बाद केरल के मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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